हरियाणा के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अनुबंध आधार नियुक्त किए गए कंप्यूटर अध्यापकों और कंप्यूटर लैब सहायकों की सेवाओं को 31 मई, 2016 तक बढ़ा दिया गया है। इनकी सेवा अवधि 31 मार्च को समाप्त हो गई थी, लेकिन उन्हें अगले दो माह तक और सेवा में रखने का फैसला लिया गया है। शिक्षा विभाग के इस फैसले से खुश कंप्यूटर अध्यापकों ने शिक्षा मंत्री से मिलकर उनका आभार व्यक्त किया है।
शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल इंडिया की सोच को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा विभाग में विद्यार्थियों के डाटा से लेकर अध्यापकों व गैर शैक्षणिक स्टाफ का विस्तृत ब्यौरा कंप्यूटर के माध्यम से ऑनलाइन करने जा रही है।
इसके बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली में जहां पारदर्शिता आएगी, वहीं कार्य में तेजी भी आएगी। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को सरकारी स्कूलों में जो प्रवेश उत्सव शुरू हुआ है, उसमें भी विद्यार्थियों का दाखिला ऑनलाइन किया जाएगा। इसके अलावा विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति एवं अन्य शुल्कों की जानकारी भी कंप्यूटर में रखी जाएगी ताकि बार-बार शिक्षा विभाग को स्कूलों से सूचना न मांगनी पड़े।
उधर, करीब 2600 कंप्यूटर शिक्षकों ने दो माह की राहत मिलने पर खुशी तो जताई है, लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से उन्हें नौकरी से हटाकर नए सिरे से कांट्रैक्ट पर 3336 कंप्यूटर शिक्षकों की भरती किए जाने के फैसले को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दे दी है।
पिछले साल करीब आठ महीने चले आंदोलन के बाद सरकार ने उन्हें अनुबंध के आधार पर ही 31 मार्च, 2016 तक नौकरी पर रखा था। अब कंप्यूटर शिक्षकों का मानना है कि सरकार ने भरती प्रक्रिया पूरी करने के लिए अगले दो महीने मौजूदा कंप्यूटर शिक्षकों से काम चलाने की योजना बनाई है, लेकिन अगर कांट्रैक्ट पर नई भरती हुई तो विभाग को हाईकोर्ट का सामना करना होगा।
ल्लेखनीय है कि पिछले साल कंप्यूटर शिक्षकों की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कांट्रैक्ट कर्मियों को हटाकर उनकी जगह नए कांट्रैक्ट कर्मियों की भरती को गलत ठहराया था। इसी को आधार बनाकर इस बार हाईकोर्ट पहुंचे कंप्यूटर शिक्षकों की याचिका पर हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के निदेशक को नोटिस भी जारी कर दिया है। मामले की सुनवाई सोमवार को होगी। इस बीच, लैब सहायकों ने भी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।