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समय पर नहीं पहुंचाया नॉनवेज आइटम, उपभोक्ता फोरम ने लगाया 50 हजार का जुर्माना

Wed, 05 Apr 2017 09:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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- फोटो : Demo Pic
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राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंडीगढ़ ने मेसर्स अशोक फिश मर्चेंट की अपील खारिज करते हुए उपभोक्ता फोरम के फैसले को बरकरार रखा है। यह आदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंडीगढ़ के अध्यक्ष जस्टिस (रिटायर्ड) जसबीर सिंह ने सुनवाई के बाद दिया है।
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मेसर्स अशोक फिश मर्चेंट ने उपभोक्ता फोरम के फैसले के खिलाफ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अपील की थी जिसे आयोग ने खारिज कर दी। उपभोक्ता फोरम ने सुनवाई के बाद 5 अक्तूबर, 2016 को मेसर्स अशोक फिश मर्चेंट को निर्देश दिया था कि वह शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी के लिए 50 हजार रुपये मुआवजा और 5500 रुपये मुकदमा खर्च अदा करे।

शिकायतकर्ता संतोष सिंह निवासी सेक्टर-51 डी ने सेक्टर-21 सी चंडीगढ़ स्थित मेसर्स अशोक फिश मर्चेंट के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत दी थी। आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के अंदर निर्देश का पालन करना था। अशोक फिश मर्चेंट ने उपभोक्ता फोरम में अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उन्होंने सेवा में कोताही नहीं की है। 
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यह था मामला

- फोटो : Demo Pic
यह था मामला
शिकायतकर्ता संतोष सिंह ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम-2 चंडीगढ़ को दी शिकायत में कहा कि मेसर्स अशोक फिश मर्चेंट से नॉन वेजिटेरियन आइटम का आर्डर 5 दिसंबर , 2015 को अपनी बेटी की शादी शामिल होने वाले बारातियों के सर्व के लिए आर्डर दिया था। इसके लिए उन्होंने 10 हजार रुपये एडवांस में भी दिए थे। शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता फोरम को बताया कि कि बुकिंग आइटम की जरूरत 5 दिसंबर, 2015 को सुबह नौ बजे सेक्टर-45 स्थित कम्युनिटी सेंटर में थी। ताकि उसे ठीक तरह से कुक किया जाए और बारातियों को सर्व किया जाए।

शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता फोरम को बताया कि मेसर्स अशोक फिश मर्चेंट ने पूरी तरह से डिलिवरी नहीं की। जब कि इस संबंध में बार बार फोन किया। इसके कारण उन्हें बारात और गेस्ट के सामने जलील होना पड़ा। शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता फोरम को बताया कि मेसर्स अशोक फिश मर्चेंट ने सामान की आपूर्ति नौ बजे कि स्थान पर दोपहर बारह बजे के बाद किया। साथ ही लेग चेस्ट और चिकन की डिलिवरी नहीं की। इसके कारण दूसरे से मीट शॉप से अरेंज करना पड़ा। लेट से डिलिवरी करने के कारण केटरर इस पोजिशन में नहीं था कि वह भोजन तैयार कर सके। इसके बाद शिकायतकर्ता ने 7 दिसंबर 2015 को कानूनी नोटिस भी भेजा था।
 
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