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पथरी निकालने के बाद अंदर छोड़ दी ड्रेन पाइप, सुपरिटेंडेंट और दो सर्जन पर साढ़े छह लाख जुर्माना

Thu, 09 May 2019 11:59 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सर्जरी करते डॉक्टर
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सर्जन और स्टाफ ने एक महिला के पेट के अंदर ऑपरेशन के दौरान आधी ड्रेन पाइप छोड़ दी। महिला को ड्रेन पाइप निकलवाने के लिए दोबारा सर्जरी करानी पड़ी। इससे महिला को मानसिक और शारीरिक पीड़ा झेलनी पड़ी। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम ने जीएमएसएच-16 के सुपरिंटेंडेंट और दो सर्जन को मेडिकल नेग्लिजेंसी का दोषी पाया है।
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फोरम ने तीनों को निर्देश दिए हैं कि वह शिकायतकर्ता को मेडिकल नेग्लिजेंसी और सेवा में कोताही बरतने की एवज में चार लाख रुपये जारी करें। इसके साथ ही दर्द व मानसिक पीड़ा व उत्पीड़न की भरपाई के लिए दो लाख रुपये मुआवजा भी अदा करने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा उन्हें 50 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देना होगा। आदेश की प्रति मिलने पर 30 दिनों के अंदर इस आदेश का पालन करना होगा।

दी जाने वाली राशि पर हॉस्पिटल स्टाफ को 9 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देना होगा।
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ये है मामला

जिला शिमला गांव प्रेमनगर निवासी ऊषा वर्मा ने फोरम में मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, डॉक्टर डाबर, डॉ. बल,  डॉ. सरबजीत सिंह के खिलाफ शिकायत दी थी। फोरम ने डॉ. सरबजीत सिंह को क्लीन चिट देते हुए उनके खिलाफ शिकायत को डिसमिस कर दिया। वहीं शिकायत में बताया कि 16 अक्तूबर 2015 को ऊषा ने आउटडोर पेशेंट के रूप में गाल ब्लेडर रिमूव करवाने के लिए जीएमएसएच-16 के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के पास रजिस्ट्रेशन करवाया।

गाल ब्लैडर निकालने की लेप्रोस्कोपिक प्रक्रिया के लिए वह एडमिट हो गई। 17 अक्तूबर 2015 को डॉक्टर डाबर और डॉ. बल की तरफ से इस प्रक्रिया को अंजाम दिया गया, जिसके बाद 19 अक्तूबर 2015 को उपयुक्त स्थिति में उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। 21 अक्तूबर 2015 को ड्रेन रिमूव करवाने के लिए उसने दोबारा हॉस्पिटल विजिट की। ऊषा ने आरोप लगाया कि दोनों डॉक्टरों ने अन्य हॉस्पिटल स्टाफ के साथ ड्रेन लापरवाही से रिमूव की।

इसी दिन शिकायतकर्ता को अल्ट्रसाउंड करवाने के लिए बोला गया और डॉ. ने उन्हें कहा कि सब कुछ ठीक है, इसलिए उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। शिकायतकर्ता ने बताया कि इसके बाद उन्हें दर्द हुआ, जिसके चलते सीटी स्कैन किया गया। इसमें आया कि उनके पेट के अंदर ड्रेन पाइप है। डॉक्टरों ने कहा कि उनका दोबारा से ऑपरेशन करना होगा। इसके लिए वह हॉस्पिटल में एडमिट हो गई और दूसरी सर्जरी करके ड्रेन पाइप को निकाल दिया गया।

शिकायतकर्ता ने कहा कि दोनों डॉक्टरों ने इसमें लापरवाही की, क्योंकि उन्हीं ने पहली सर्जरी और ड्रेन रिमूव की थी। आरोप है कि इस प्रक्रिया में उसके दो लाख रुपये से अधिक खर्च हो गए। उसको अस्पताल की ओर से कोई राहत भी नहीं दी गई तो उन्होंने फोरम में शिकायत की।
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