कारपोरेट सेक्टर को कंपनियों से संबंधित वाद, विवाद और अनुमतियों की सुनवाई के लिए अब हाईकोर्ट की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। मिनिस्ट्री ऑफ कारपोरेट अफेयर्स ने एक जून को नोटिफिकेशन जारी कर देश के पहले नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल का गठन कर दिया है।
इसकी प्रिंसिपल बेंच नई दिल्ली में बनाई गई है। नार्दर्न रीजन में चंडीगढ़ और इलाहाबाद में बेंच होगी। इसके अलावा अहमदाबाद, बंगलूरू, चेन्नई, गुवाहाटी, हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई में बेंच बनाई गई है। ट्रिब्यूनल में वाद प्रस्तुत करने और कंपनी को रिप्रजेंट करने का अधिकार कंपनी सचिव को दिया गया है।
अभी यह अधिकार हाईकोर्ट के वकील के पास था। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के प्रभावी होने के बाद कंपनियों से जुड़े सभी वादों का निपटारा, कंपनी के मर्जर, विलय एवं एकीकरण की अनुमति ट्रिब्यूनल में होगी। शेयरधारकों को कंपनी के अंदर प्रबंधकीय फ्रॉड की शिकायत भी ट्रिब्यूनल में करनी पडे़गी। ट्रिब्यूनल का फैसला ही अंतिम फैसला होगा।
ये होंगे फायदे
कंपनी सचिवों के लिए प्रैक्टिस का नया क्षेत्र
सालों तक हाईकोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
वकीलों की महंगी फीस से मुक्ति मिलेगी।
कंपनी सचिव इन मामलों को देख सकेंगे।
सीएस अंकुर श्रीवास्तव, पूर्व प्रेसिडेंट, इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी ने बताया कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के गठन से देश का पूरा कारपोरेट सेक्टर बदल जाएगा। अब एक स्पेशल प्लेटफार्म पर स्पेशलाइज्ड प्रोफेशनल कंपनी मामलों की सुनवाई करेंगे। उन्हें इनकी बारीकियां भी पता होंगी और इसके जोखिम भी। सबसे बड़ी बात ये कि कारपोरेट मामलों में उचित समय पर सही न्याय मिल सकेगा।