भाजपा ने उत्तराखंड में भी इसी तरह कई दिग्गजों को किनारे किया और पुष्कर सिंह धामी को सत्ता की कमान सौंप दी। जबकि इस रेस में बीसी खंडूरी, सतपाल महाराज, रमेश पोखरियाल निशंक समेत कई दिग्गज शामिल थे लेकिन भाजपा हाईकमान ने पुष्कर सिंह धामी को सीएम बना दिया बिल्कुल वैसा ही दृष्य पंजाब में कांग्रेस ने दोहराया है।
पंजाब में ब्रह्म मोहिंदरा भी काफी वरिष्ठ नेता हैं और तीन बार मंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा रवनीत सिंह बिट्टू हैं, जो तीसरी बार लगातार सांसद बने और दिवंगत सीएम बेअंत सिंह के पौत्र हैं। लिहाजा, कांग्रेस ने सभी दिग्गजों की दौड़ में से चन्नी को छांट लिया।
एक तरफ राज्य में कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिद्धू की जंग जगजाहिर रही है तो वहीं प्रताप सिंह बाजवा से भी सिद्धू के अच्छे संबंध नहीं रहे हैं। इसके अलावा जाखड़ को सीएम बनाए जाने की स्थिति में सिखों की नाराजगी का खतरा रहा। इसलिए चन्नी को सीएम बनाकर कांग्रेस ने गुटबाजी को खत्म किया है तो वहीं दलितों के साथ सिखों को भी साधने का काम किया है।