अबोहर का 90 प्रतिशत पानी खारा है जो न तो सिंचाई और न ही पीने के लिए उपयोगी है। इस उपमण्डल के 4 लाख लोगों के सामने एसवाईएल पर फैसले के बाद दो वक्त की रोटी का संकट पैदा हो सकता है।
सन् 1966 में आंदोलन करके पंजाब का बंटवारा करवाने का मुर्खतापूर्ण निर्णय अकालियों ने राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए लिया। कांग्रेस सांसद व विधायक 17 नवम्बर को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से मुलाकात कर निवेदन किया जाएगा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस सम्बंध में दी गई सलाह को अनदेखा कर दें।
ये बातें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने रविवार अबोहर के गांव खुईयां सरवर में आयोजित रैली के दौरान कहीं। रैली में उपस्थित किसानों को सम्बोधित करते हुए कैप्टन ने कहा कि एसवाईएल के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पंजाब के विरूद्ध फतवा देने और इस प्रकरण में उनके तथा विधायकों के त्याग पत्र के बाद अबोहर क्षेत्र से पानी के मुद्दे पर पंजाब सरकार के विरूद्ध बिगुल बजाने का निर्णय इसलिए किया कि यहां 90 प्रतिशत पानी खारा है।
अकालियों को वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेवार ठहराते हुए कैप्टन ने कहा कि 1966 में आंदोलन करके पंजाब का बंटवारा करवाने का मुर्खतापूर्ण निर्णय अकालियों ने राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए लिया।
अकालियों की सोच यह थी कि यदि सिखों की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी तो वे पंजाब में सत्ता का सुख नहीं भोग पाएंगे। इसलिए पंजाबी सूबा बनवाकर अनेक उपजाऊ क्षेत्र हरियाणा को दे दिए गए। अब उसी हरियाणा से पानी के मुद्दे पर विवाद चल रहा है।