चंडीगढ़ ने स्वच्छ भारत अभियान के लिए बेशक ओडीएफ प्लस प्लस की श्रेणी में आवेदन किया हो, लेकिन शौचालयों की स्थिति तो कुछ और बयां कर रही है। कहीं शौचालयों में गंदगी पड़ी है तो कहीं सीमेंट झड़ रहा है। छत से पानी भी टपक रहा है। इतना ही नहीं कहीं काई जमी हुई थी। ऐसे में कितना भी जोर लगा लें, लेकिन बेहतर पायदान का सपना पूरा होने से फिर पीछे रह जाएंगे। शहर में कुल 289 सार्वजनिक शौचालय हैं, वहीं 29 सामुदायिक शौचालय हैं। जरूरत के अनुसार मोबाइल टॉयलेट लगवाए जाते हैं।
नगर निगम ने शहर की प्रमुख मार्केटों सहित कुछ स्थानों पर 30 नए स्मार्ट टॉयलेट बनाए हैं। इनमें व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं, लेकिन सेक्टर-22 में टॉयलेट की स्थिति दयनीय है। वहां फर्श क्षतिग्रस्त पड़ा था। छत में सीलन आ गई थी। सेक्टर-15 मार्केट में दुर्गंध के कारण लोगों का अंदर जाना मुश्किल था। सेक्टर-20 की मार्केट में बने टॉयलेट की हालत तो काफी गंभीर है। वहां टॉयलेट के रखखाव के लिए तैनात व्यक्ति को छत से टपकते पानी से बचाव के लिए तिरपाल का सहारा लेना पड़ता है।
अपने पर्यटन स्थलों के लिए सिटी ब्यूटीफुल हमेशा से चर्चित रहा है। सुखना लेक हो या गार्डन लोगों का मन मोह लेते हैं, लेकिन यहां के शौचालय भी बेहतर स्थिति में नहीं हैं। शहर की सबसे ज्यादा भीड़ वाली जगह सुखना लेक का शौचालय गंदा पड़ा हुआ था। फर्श की सफाई तो ठीक थी, लेकिन छत पर सीलन के कारण पानी टपक रहा था। दूसरा शौचालय काफी गंदा पड़ा हुआ था। यही हाल रोज गार्डन के शौचालय का था। अब रोज फेस्टिवल आने वाला है, लेकिन यहां बने शौचालय की छत पूरी तरह खराब पड़ी है। हालत यह है कि अगर इसे समय रहते ठीक नहीं करवाया गया तो किसी बड़े हादसे का कारण भी बन सकती है।
सेक्टर-22 के मार्केट में बने दो शौचालय क्षतिग्रस्त अवस्था में है। एक शौचालय का निर्माण कार्य अभी चल रहा है। बाजार में आने वाले लोगों की भीड़ के हिसाब से सभी शौचालय ठीक अवस्था में होना आवश्यक है। -जसविंदर नागपाल, प्रधान सेक्टर-22