अगर आप ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना चाहते हैं तो एक नया नियम फॉलो करना होगा। चंडीगढ़ में यह सुविधा शुरू हो गई है। इसके तहत ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) से पता चल जाएगा कि व्यक्ति मौत के बाद अपने अंगों को दान करना चाहता है या नहीं।
पीजीआई के प्रस्ताव को चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन और सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। पीजीआई की ओर से एक प्रस्ताव बनाया गया था कि ड्राइविंग लाइसेंस में कुछ ऐसा प्रावधान रखा जाए, जिसे देखते ही पता चल जाए कि व्यक्ति ने अंगदान की शपथ ली है।
अब जो भी नए लाइसेंस बन रहे हैं, उसमें ओडी लिखा होगा। ओडी का मतलब ऑर्गन डोनर। नए लाइसेंस के लिए भरे जाने फार्म में एक विकल्प होगा, जिसमें लिखा होगा कि आप मृत्यु के बाद अपने ऑर्गन डोनेट करना चाहते हैं या नहीं। यदि आप अंगदान करना चाहते हैं तो विकल्प के आगे हां भरना होगा।
पीजीआई का प्रपोजल
पीजीआई की ओर से प्रपोजल बनाने वाले हीप्टोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर आरके धीमान ने बताया कि पश्चिमी देशों में इस तरह का प्रावधान काफी पहले से है। खासकर यूएसए, कनाडा, यूरोप और आस्ट्रेलिया में। भारत में सिर्फ कर्नाटक ऐसा प्रदेश है, जहां पर यह व्यवस्था है।
कर्नाटक के बाद अब चंडीगढ़ देश का दूसरा यूटी बन गया है। वहीं नया प्रावधान शुरू होने पर पीजीआई ने चंडीगढ़ के एडवाइजर विजय कुमार देव व आरएलए के रजिस्ट्रार कशिश मित्तल का आभार जताया है।
इसलिए यह प्रावधान
भारत में आर्गन डोनेशन की दर काफी कम है। भारत में हर साल दो लाख किडनी फेल के मरीज सामने आते हैं। इसी तरह से लीवर व हार्ट फेल का रेट भी काफी अधिक है। इन मर्ज का आखिरी इलाज ट्रांसप्लांट है। अंग के इंतजार में हर साल हजारों लोगों की मौत हो जाती है।
भारत में हर साल सवा लाख लोगों की मौत रोड एक्सीडेंट में होती है। इन लोगों के अंग उन जरूरतमंदों को दिए जा सकते हैं, जिनके अंग समय से पहले खराब हो जाते हैं। कई लोग आर्गन डोनेशन की शपथ ले लेते हैं, लेकिन उनकी मौत के बाद जब उनके परिजनों से इस बारे में बात की जाती है तो वे मानने से इंकार कर देते हैं।
ड्राइविंग लाइसेंस में ओडी लिखे होने पर कम से कम यह तो साफ हो जाएगा कि व्यक्ति ने अंगदान की शपथ ली थी कि नहीं। उसके बाद उसके अंगदान किए जा सकते हैं।