25 से 30 दिनों को कोयल स्टॉक जरूरी
तय नियमों के मुताबिक थर्मलों में 25 से 30 दिन का कोयला होना जरूरी है, लेकिन वर्तमान में पंजाब के सरकारी थर्मल प्लांट रोपड़ में 20 दिन का और लहरां मुहब्बत थर्मल प्लांट में 17 दिन का कोयला शेष है। उधर, प्राइवेट में तलवंडी साबो प्लांट में आधे दिन का, राजपुरा थर्मल प्लांट में सात दिन का और गोइंदवाल साहिब में मात्र डेढ़ दिनों का कोयला बचा है। कोयले की कमी के चलते ही तलवंडी साबो और गोइंदवाल साहिब के एक-एक यूनिट को फिलहाल बंद कर दिया गया है। इस समय लहरां मुहब्बत के चार यूनिटों में से एक, रोपड़ के भी चार यूनिटों में से तीन चल रहे हैं। जबकि तलवंडी साबो के तीन में से दो, गोइंदवाल साहिब के दो में से एक और राजपुरा के दोनों यूनिट चल रहे हैं। पावरकॉम की इन थर्मलों समेत हाइडल प्रोजेक्टों व सोलर प्रोजेक्टों से बुधवार को कुल 4160 मेगावाट बिजली मिली। वहीं पावरकॉम ने बाहर से 3456 मेगावाट बिजली ली।
यूक्रेन व रूस की लड़ाई के कारण कोयला महंगा
पावरकाम के अधिकारियों के मुताबिक यूक्रेन और रूस के बीच लड़ाई के चलते बाहर से आने वाला कोयला महंगा हो गया है। ऐसे में सरकारी थर्मलों के साथ-साथ अब प्राइवेट प्लांट भी कोल इंडिया पर निर्भर हो गए हैं। जबकि पहले प्राइवेट प्लांट कोल इंडिया के साथ-साथ बाहर से आयात होने वाला कोयला भी खरीदते थे। जिस कारण अचानक से कोल इंडिया के लिए कोयले की डिमांड बढ़ गई है। उस हिसाब से कोल इंडिया कोयले की प्रोडक्शन नहीं कर पा रहा है। नतीजतन कोयले की सप्लाई में कमी हो गई है। पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के प्रेसीडेंट इंजीनियर जसवीर सिंह धीमान ने कहा कि पावरकॉम मैनेजमेंट को चाहिए था कि गर्मी व आने वाले पैडी सीजन को देखते हुए तुरंत थर्मल प्लांटों में कोयले के स्टॉक को बढ़ाने पर ध्यान दें। वर्ना पिछले साल से भी ज्यादा इस बार पंजाब को बिजली की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।
स्टॉक तुरंत नियमों के अनुसार बढ़ाया जाए
उधर पीएसईबी इंप्लाइज ज्वाइंट फोरम के प्रदेश जनरल सेक्रेटरी कर्मचंद भारद्वाज ने कहा कि पंजाब के थर्मल प्लांटों में कोयले का स्टॉक तुरंत तय नियमों के अनुसार बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि लगता है कि पावरकॉम मैनेजमेंट ने पिछले साल से कुछ सीखा नहीं है। गरमी व पैडी सीजन के मद्देनजर थर्मलों में एडवांस में ही कोयले का बड़ा स्टॉक होना चाहिए। जिससे आगे चलकर दिक्कतें न आएं।