कांग्रेसी भी मानते हैं कि भले ही अमरिंदर सिंह नई पार्टी बनाकर कोई खास कमाल न कर पाएं लेकिन कांग्रेस का रास्ता जरूर मुश्किल बनाएंगे। जानकारी के अनुसार हाईकमान ने चुनावी रोडमैप तैयार करने के लिए चन्नी को जो दिशानिर्देश दिए हैं, उसके अनुसार वे माझा, मालवा और दोआबा के विधायकों से वन टू वन बातचीत कर 117 हलकों के लिए रोडमैप तैयार करेंगे। खास बात यह है कि अब तक चुनावों में कांग्रेस हाईकमान भी चुनावी रोडमैप तैयार करने में प्रदेश इकाई और सरकार को सहयोग देता रहा है लेकिन इस बार सारा जिम्मा मुख्यमंत्री चन्नी पर छोड़ दिया है।
हाईकमान के सामने टूटा सिद्धू का तिलस्म
पार्टी सूत्रों के अनुसार हाईकमान अब तक नवजोत सिद्धू पर आंखें मूंदकर भरोसा करता रहा है लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस के खिलाफ मुहिम, चन्नी सरकार के खिलाफ सिद्धू की मुहिम और प्रदेश कांग्रेस के लिए अब तक कोई भी ठोस काम न करने पाने के कारण हाईकमान मानने लगा है कि सिद्धू उतने मजबूत नेता साबित नहीं हो रहे हैं, जिनके दम पर विधानसभा चुनाव में पार्टी को मजबूत जीत हासिल हो सके। कैप्टन की वजह से हटाए गए चार मंत्रियों राणा गुरमीत सोढ़ी, साधु सिंह धर्मसोत, बलबीर सिंह सिद्धू और सुंदर शाम अरोड़ा के राहुल से मुलाकात करने के बाद भी आलाकमान का सिद्धू के प्रति रुख बदला है। मुलाकात में इन पूर्व मंत्रियों ने पंजाब में कैप्टन के बगैर कांग्रेस की हालत और सिद्धू के रवैये को लेकर पूरी जानकारी दी है।
शाह से नहीं हुई मुलाकात तो मिला मौका
कांग्रेस कैप्टन अमरिंदर के हर दांव पर नजर टिकाए बैठी है। उनकी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात होनी थी लेकिन यह टल गई। माना जा रहा है कि कांग्रेस इसी मौके को भुनाना चाह रही है। वह अमरिंदर को कांग्रेस में ही रोकने के प्रयास में जुट गई है, ताकि नई पार्टी बनाकर वे पंजाब में नुकसान न पहुंचा पाए फिर अमरिंदर ने अभी कांग्रेस छोड़ी भी नहीं है। छोड़ने के सवाल पर उन्होंने साफ कहा था कि मैं 50 साल से कांग्रेस में हूं, 10 दिन और रह लूंगा तो क्या बिगड़ जाएगा।