पंजाब में गर्मी के तीखे होते तेवरों के कारण बिजली की मांग बढ़ गई है। यही वजह है कि पावरकॉम ने रोपड़ व लहरा मुहब्बत थर्मल प्लांट की आठ में से सात यूनिटों में उत्पादन शुरू कर दिया है। उधर, निजी पावर प्लांटों के भी इस समय मात्र दो यूनिट बंद हैं, बाकी पांच में बिजली का उत्पादन हो रहा है लेकिन बड़ी बात यह है कि थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट अभी भी बना है।
खासतौर से निजी थर्मलों में तो मात्र तीन से छह दिन का कोयला शेष है। ऐसे में अगर इसी तरह से पूरी क्षमता के साथ प्राइवेट थर्मल प्लांटों को चालू रखा गया तो अगले कुछ दिनों में कोयले का संकट गहराने से लंबे कट की नौबत आ सकती है। विशेषज्ञ पहले ही इस संबंध में आशंका जता चुके हैं कि अगर कोयले का संकट गहराया तो हालात पिछले साल से भी अधिक बदतर होंगे।
रोपड़ के चार में से तीन यूनिट और लहरा मुहब्बत के चारों यूनिटों को पावरकॉम ने चला दिया है। इन दोनों थर्मलों से पावरकॉम को इस समय 1381 मेगावाट बिजली मिल रही है। रोपड़ में 19 और लहरा में 20 दिनों का कोयला बचा है। उधर, प्राइवेट प्लांटों में स्थिति अधिक खराब है। गोइंदवाल साहिब में केवल तीन, तलवंडी साबो में चार और राजपुरा में छह दिनों का कोयला शेष है। हालांकि बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए तलवंडी साबो के 660-660 मेगावाट की तीन यूनिटों को चला दिया है, जबकि पहले दो ही यूनिट चल रही थीं।
राजपुरा और गोइंदवाल की एक-एक यूनिट को ही फिलहाल कोयले की कमी के चलते चलाया जा रहा है। वहीं दो यूनिटों के बंद होने से 970 मेगावाट बिजली का उत्पादन नहीं हो पा रहा है। शनिवार को पावरकॉम को प्राइवेट थर्मलों से 2153 मेगावाट, वहीं हाइडल प्रोजेक्टों से 389 मेगावाट और अन्य स्रोतों को मिलाकर करीब 4106 मेगावाट बिजली की मिली है। शनिवार को पंजाब में बिजली की मांग 7050 मेगावाट के करीब दर्ज की गई, जिसे पूरा करने के लिए पावरकॉम को 2935 मेगावाट बिजली बाहर से खरीदनी पड़ी।
गौरतलब है कि रूस व यूक्रेन के बीच युद्ध के कारण कोयले के दाम में वृद्धि होने कारण अब बाहर से कोयला मंगवाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में अब सरकारी और निजी थर्मल प्लांट कोल इंडिया पर निर्भर हैं। यही वजह है कि कोयले का संकट पैदा हो गया है।