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हरियाणा: कम से कम 30 प्रतिशत सूक्ष्म सिंचाई की शर्त में ढील, वाटर कोर्स की मरम्मत व 40 फुट प्रति एकड़ तक बढ़ाने का रास्ता साफ

Thu, 10 Mar 2022 10:24 PM IST
भूपेंद्र सिंह यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

वाटर कोर्स के लिए लघु सिंचाई नहरों पर नई पुलियां बनाने के लिए एक से दूसरी पुलिया के बीच की दूरी अब 500 मीटर होगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : irrigation pattern
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विस्तार
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हरियाणा में वाटर कोर्स को 24 से 40 फुट प्रति एकड़ तक बढ़ाने व उनकी मरम्मत करने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने इसके लिए तय न्यूनतम 30 प्रतिशत सूक्ष्म सिंचाई की शर्त में एक साल के लिए ढील देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही लघु सिंचाई नहरों पर नई पुलियां बनाने के लिए एक से दूसरी पुलिया के बीच की दूरी अब 500 मीटर होगी।

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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने तय नियमों में ढील देने को मंजूरी दे दी है। साथ ही इसे बजट में भी शामिल कर लिया है। सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए लिए गए ये निर्णय पहली अप्रैल 2022 से शुरू होंगे। अभी वाटर कोर्स की मरम्मत करना व उसे 24 से 40 फुट प्रति एकड़ तक बढ़ाना आसान नहीं है। इसके लिए न्यूनतम 30 प्रतिशत सूक्ष्म सिंचाई की शर्त आड़े आती है। जिससे इस प्रणाली को बढ़ावा देने में सिंचाई विभाग को दिक्कत आ रही है।

विभाग इस कारण बड़े क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई के तहत कवर करने में सक्षम नहीं हो पा रहा। इसलिए शर्तों में ढील का प्रस्ताव था, जिसे हरी झंडी मिल चुकी है। इसलिए अत्यधिक क्षतिग्रस्त होने के कारण वाटर कोर्स की तत्काल मरम्मत नए वित्त वर्ष से हो सकेगी। इन्हें संरचनात्मक तौर पर भी सही किया जाएगा।
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मुख्यमंत्री का कहना है कि नई पुलियों के निर्माण के लिए अभी एक से दूसरी पुलिया के बीच न्यूनतम दूरी 1000 मीटर होने का मानदंड है। किसानों ने इसमें ढील देने की मांग उठाई थी। जिसे देखते हुए न्यूनतम दूरी को घटाकर 500 मीटर कर रहे हैं। इससे माइनर के दोनों ओर के खेतों को लघु सिंचाई नहरों से जोड़ा जा सकेगा। इससे किसानों को काफी लाभ होगा।

अभी इन नहरों पर 1308 पुलियां हैं। मानदंडों में ढील देने के बाद लगभग 1000 और पुलियां बनने की मांग आने की उम्मीद है। सरकार इन पुलियों का निर्माण चरणबद्घ तरीके से तीन वर्षों में कर लेगी। मुख्यमंत्री का कहना है कि कम भूजल स्तर वाले क्षेत्रों में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली सबसे बेहतर विधि है। किसानों ने इसमें काफी रुचि दिखाई है। इसलिए सरकार नियमों में बड़े बदलाव करने जा रही है।

पर ड्राप मोर क्रॉप के तहत 1214 करोड़ देंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत पर ड्राप, मोर क्राप घटक में सब्सिडी के रूप में 1214 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। सरकार सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए आधारभूत संरचना पर 85 प्रतिशत सरकार वहन करेगी, किसानों को कुल लागत का 15 प्रतिशत ही देना पड़ेगा। रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी व भिवानी जिलों में लिफ्ट सिंचाई प्रणाली की पंपिंग मशीनरी की क्षमता और दक्षता में सुधार किया जाएगा।

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