स्नेहालय में ट्रेसपासिंग के मामले में कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (सीसीपीसीआर) ने मेयर आशा जसवाल को क्लीनचिट दे दी है। आयोग ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट पंजाब के राज्यपाल और प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को भेज दी।
सीसीपीसीआर की चेयरपर्सन देवी सिरोही ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि मेयर ने स्नेहालय में ट्रेसपासिंग नहीं की। जांच में पाया गया कि मेयर ने स्नेहालय आने की सूचना पहले ही वहां की सुपरिंटेंडेंट मुकेश लता को भेज दी थी। स्नेहालय आने पर मुकेश लता ने मेयर और उनके साथ आए अन्य लोगों का स्वागत किया था। मेयर के साथ आए पार्षदों और अन्य 35 लोगों ने स्नेहालय में दाखिल होने से पहले विजिटर्स रजिस्टर में बाकायदा एंट्री की थी। आयोग के समक्ष मेयर ने बयान दर्ज कराया था कि वह लड्डू बांटने के लिए स्नेहालय गई थी। स्नेहालय के कर्मचारियों और समाज कल्याण विभाग के कर्मियों की ओर से भी इसकी पुष्टि की गई है।
कुकर्म पीड़ित से बंद कमरे में मिलीं
कुकर्म पीड़ित लड़के की पहचान उजागर करने के मामले में भी रिपोर्ट में मेयर को क्लीनचिट मिल गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आयोग के समक्ष सभी कर्मचारियों ने यही कहा है कि पीड़ित बच्चे से मेयर बंद कमरे में मिली थीं। ऐसे संकेत हैं कि स्नेहालय के ही कर्मचारी ने मेयर को पीड़ित बच्चे से मिलवाया था। दर्ज बयानों से यह स्पष्ट नहीं होता कि किसी मीडिया कर्मी ने पीड़ित बच्चे के साथ मेयर की फोटो खींची थी।
पुलिस कर सकती है एफआईआर खारिज
चंडीगढ़ की मेयर आशा जसवाल
- फोटो : File Photo
नीति बनाने की सिफारिश
आयोग ने प्रशासक को भेजी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि स्नेहालय जाने वाले वीवीआईपी, मीडिया कर्मियों और अन्य लोगों के लिए नीति बनाई जानी चाहिए।
पुलिस कर सकती है एफआईआर खारिज
पूर्व डीएसपी व वकील सुभाष सागर कहना है कि सीआरपीसी की धारा 173 के तहत पुलिस एफआईआर खारिज कर सकती है। पुलिस अपनी जांच रिपोर्ट दे सकती है कि मेयर पर किसी तरह का आरोप साबित नहीं होते।
बार का मिला साथ
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और चंडीगढ़ डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन्स भी मेयर के समर्थन में आ गई हैं। दोनों बार एसोसिएशन्स की ओर से प्रशास वीपी सिंह बदनौर को पत्र लिखकर एफआईआर रद्द करने के आदेश जारी करने की अपील की गई है। साथ ही मांग की गई है कि दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
सीसीपीआरसी की जांच रिपोर्ट में मेयर को क्लीन चिट मिल गई है। अब उनके खिलाफ मलोया थाने में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द होनी चाहिए।
- सतिंदर सिंह, पूर्व पार्षद, भाजपा