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पीयू में 78 विभागों के क्लासरूम होंगे स्मार्ट, करोड़ों खर्च करेगा विवि

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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय अपने 78 विभागों के क्लासरूम को स्मार्ट करने जा रहा है। इसके लिए 16 सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इस कार्य पर करोड़ों रुपये खर्च होंगे। यह निर्णय जैसे ही शिक्षकों को पता लगा तो उन्होंने इसकी आलोचना की।
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उन्होेंने कहा कि इस कार्य की जरूरत नहीं है। इसके लिए विभागों को सुविधाएं दी जाएं और शिक्षकों का अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराया जाए। यह भी कहा कि पूर्व में स्मार्ट बोर्ड खरीदे थे, लेकिन उनका पता ही नहीं चल रहा। स्मार्ट क्लासरूम की परिभाषा काफी पुरानी हो चुकी है। निजी शिक्षण संस्थानों के क्लासरूम भी स्मार्ट हैं। पीयू के विज्ञान संकाय में भी कुछ कक्षाओं में प्रोजेक्टर आदि लगे हैं। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए विश्वविद्यालय एक विभाग के दो से तीन क्लासरूम को स्मार्ट करने की तैयारी कर रहा है।
सूत्रों का कहना है कि इस पर करोड़ों रुपये व्यय होंगे। इस समय विश्वविद्यालय आर्थिक तंगी में है। ऐसे में करोड़ों रुपये बहाने के प्र्रस्ताव को शिक्षक सही नहीं मान रहे। उनका कहना है कि कोरोना के समय कक्षाएं ऑनलाइन शुरू हुईं। उस दौरान शिक्षकों को समुचित सुविधाएं दी जानी चाहिए थीं जो काफी देर बाद मिल पाईं।
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कैंपस के कैमरे सुधारते तो सुरक्षा होती
पीयू के शिक्षकों का कहना है कि कैंपस में कोई घटना हो जाए तो उसका पता नहीं लगता। सीसीटीवी कैमरे काम ही नहीं करते। पहले पीयू को सुरक्षा मुहैया करानी चाहिए। कैमरे ठीक करवाने चाहिए थे। सुरक्षाकर्मियों की भर्ती की जानी चाहिए। स्मार्ट क्लासरूम की आवश्यकता नहीं है। अधिकारी खुद स्मार्ट बनेंगे तो काम अपने आप होंगे। केवल रुपये बहाने वाले निर्णय नहीं लिए जाने चाहिए। उसका औचित्य समझ में आना चाहिए। अब विद्यार्थी कक्षाओं में आने लगे हैं। पढ़ाई भी हो रही है। इसके अलावा ऑनलाइन कक्षाएं भी चल रही हैं।
दो नंबर गेट हुआ था स्मार्ट, दो दिन भी नहीं चली व्यवस्था
पीयू के गेट नंबर दो को स्मार्ट बनाया गया था। रेलवे की तरह यहां ऑटोमैटिक सिस्टम लगा था जो गाड़ी आने पर खुलता था और फिर बंद हो जाता था। बैरिकेड की जरूरत खत्म कर दी गई थी। जानकारों का कहना है कि वह एक ही रात में टूट गया। आज फिर वहां बैरिकेड के जरिए सुरक्षा हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि विद्यार्थियों व शिक्षकों को ऐसी सुविधाएं दी जानी चाहिए जो काम आ सकें।
क्या कहते हैं अधिकारी
शिक्षकों ने कोरोना के समय कंप्यूटर सुरक्षा के लिए एंटी वायरस की मांग की थी जो अब जाकर मिली है। अब क्लासरूम बनाने का जो निर्णय लिया गया है, वह समझ से परे है। इसकी जगह विद्यार्थियों व शिक्षकों को कुछ विशेष सुविधाएं दी जानी चाहिए थी, जिसका सीधा लाभ मिल सके। -प्रो. अमरजीत सिंह नौरा, सचिव, पुटा
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