पंजाब के वित्तमंत्री हरपाल चीमा
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पंजाब सरकार ने अपने कर्मचारियों के मेडिकल बिलों के जल्द निपटारे के उद्देश्य से बड़ा फैसला लिया है। अब सिविल सर्जन, पंजाब और चंडीगढ़ में सरकारी मुलाजिमों द्वारा निजी अस्पतालों में कराए गए इलाज के एक लाख रुपये तक के बिलों को कार्यबाद मंजूरी और वेरिफिकेशन कर सकेंगे। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने वित्त विभाग द्वारा लिए गए इस फैसले की जानकारी दी। अब तक सिविल सर्जनों को 50 हजार रुपये तक के बिलों की वेरिफिकेशन और मंजूरी का अधिकार था।
वित्त मंत्री चीमा ने बताया कि पंजाब सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने मेडिकल बिलों के निपटारे में आ रही दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए वित्त विभाग ने राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि मेडिकल बिलों के निपटारे संबंधी प्रक्रिया के विकेंद्रीकरण के उद्देश्य से लिए गए इस फैसले से मेडिकल दावों, बिलों की प्रति-पूर्ति और निपटारे में तेजी आएगी।
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चीमा ने बताया कि साल 2010 में वित्त विभाग द्वारा निजी अस्पतालों के 25 हजार रुपये तक के मेडिकल बिलों की मंजूरी के अधिकार सिविल सर्जनों को दिए गए थे लेकिन इसके बाद इलाज की कीमतों में वृद्धि के बावजूद किसी ने भी मुलाजिमों के हित में इस हद को बढ़ाने का कोई फैसला नहीं लिया। उन्होंने कहा कि 12 साल बाद मई 2022 में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने ही इस सीमा को दोगुना करते हुए, निजी अस्पतालों के इलाज के 50 हजार रुपये तक के मेडिकल बिलों को मंजूरी का अधिकार सिविल सर्जनों को दिया था। इससे अधिक राशि के मेडिकल बिलों की कार्यबाद मंजूरी निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण द्वारा दी जाती थी।
स्वास्थ्य विभाग में बढ़ गई थी पेंडिंग मेडिकल बिलों की संख्या
चीमा ने बताया कि बीते वर्ष मेडिकल बिलों की सिविल सर्जनों द्वारा कार्यबाद मंजूरी और वेरिफिकेशन की सीमा को दोगुना करने के बावजूद निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के दफ्तर में मेडिकल बिलों की पेंडेंसी बढ़ती जा रही थी और मुलाजिमों को अपने बिल समय पर क्लियर न होने से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने कहा कि अब यह हद 50000 रुपये से दोगुना करके 1 लाख रुपये कर दी गई है।