जेपी प्लांट में पड़े 25 हजार टन कचरे को हटाने के लिए नगर निगम को लगभग पौने दो करोड़ रुपये फिर से खर्च करने होंगे। उसके बाद कचरे को डंपिंग ग्राउंड में लीगेसी माइनिंग करने वाली कंपनी को ही कचरा प्रोसेस करने के लिए दिया जाएगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश के बाद यह निर्णय लिया गया है।
नगर निगम और जेपी प्लांट के विवाद की सुनवाई वीरवार को एनजीटी में हुई थी। जिसमें जेपी प्लांट ने आरोप लगाया कि बिना प्रोसेस किए ही नगर निगम ने प्लांट में कचरा डाल दिया है। बार-बार एनजीटी के निर्देश के बावजूद नगर निगम गीला-सूखा कचरा मिक्स कर देता है। इस कारण कचरा प्रोसेस नहीं हो पा रहे हैं।
उसके बाद एनजीटी ने निगम के वकील को निर्देश देते हुए कहा कि यह कचरा निगम ने ही डाला है। इसलिए इस कचरे को हटाने की जिम्मेदारी भी निगम की है। 30 मार्च तक कचरा प्लांट से हट जाना चाहिए। कमिश्नर केके यादव का कहना है कि निर्देश के अनुसार कचरा हटाने का काम किया जाएगा।
इसमें लगभग पौने दो करोड़ रुपये का खर्चा आएगा। इस कचरे को डड्डूमाजरा स्थित डंपिंग ग्राउंड में लीगेसी माइनिंग करने वाली कंपनी को ही दे दिया जाएगा। रही बात सेग्रीगेट कचरा देने की तो इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।