निगम को कंपनी को बसों के संचालन के लिए पैसा देना पड़ रहा था। वर्ष 2014 में छह माह तक सिटी बस सर्विस बंद रही। वर्ष 2015 में होराइजन ट्रांसवेज प्राइवेट लिमिटड के साथ 83 बसों को चलाने का करार किया गया। इसमें कंपनी को प्रति बस 15 सौ रुपये निगम को देने थे।
कंपनी के साथ एग्रीमेंट में लिखा गया था जब डीजल के दाम बढ़ेंगे तो बोर्ड रेट बढ़ाएगा। होराइजन कंपनी ने बसों का परिचालन शुरू किया था, उस समय डीजल का रेट 45 रुपये लीटर था। डीजल के दाम 100 रुपये को छूकर 85 रुपये लीटर तक आ चुके है। इस दौरान बोर्ड की तरफ से बस किराया में एक रुपये की बढ़ोतरी नहीं की गई। इस घाटे के चलते यह विवाद शुरू हो गया था।
कंपनी ने निगम को प्रति बस चार्ज देना बंद कर दिया था। निगम बार-बार रिकवरी का नोटिस भेज रह था। इस मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों में विवाद बना था। 27 नवंबर को मेयर ने मामले का हल करने के लिए बैठक बुलाई थी। इसमें दोनों पक्षों में सहमति बन गई।
इतना बढ़ा किराया
- पांच रुपये की जगह 10 रुपये
- 10 रुपये की जगह 20 रुपये
- 15 रुपये की जगह 25 रुपये