हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अब बच्चों को एक कक्षा में 70 से 100 की संख्या में नहीं पढ़ना पडे़गा, बल्कि सिर्फ 35 विद्यार्थी ही पढ़ाए जाएंगे। यहीं नहीं, अब अगर कक्षा छठीं एवं आठवीं में किसी कक्षा में छात्रों की संख्या 36 से 70 होगी, तो उस कक्षा के दो सेक्शन होंगे। इसी प्रकार, यदि कक्षा 6-8 में किसी कक्षा में 71 से 105 छात्र होंगे, तो 3 सेक्शन बनाए जाएंगे।
यह उदाहरण हरियाणा के डायरेक्टर एलीमेंटरी एजूकेशन की ओर से दिया गया है। विभाग की ओर से टीजीटी एवं सी एंड वी कक्षाओं के लिए यह गाइडलाइंस जारी की गई है। यह गाइडलाइंस विभाग की ओर से नई टीचर्स ट्रांसफर पॉलिसी 2016 के रेशनेलाइजेशन के तौर पर जारी किया है। पहली बार सेक्शन का आकार शिक्षा के मौलिक अधिकार के अनुसार तय किया गया है।
गाइडलाइन के अनुसार एक सेक्शन में होंगे मात्र 35 छात्र
रेशनेलाइजेशन में सेक्शन का आकार 35 छात्रों का होगा। पहले सेक्शन का आकार 50 छात्रों का होता था। यह भी पहली बार हो रहा है कि रेशनेलाइजेशन में स्कूल छात्र संख्या की बजाय कक्षा की छात्र संख्या को आधार बनाया है। अब अगर कक्षा 6-8 में किसी कक्षा में छात्रों की संख्या 36 से 70 होगी, तो उस कक्षा के दो सेक्शन होंगे।
इसी प्रकार अगर कक्षा 6-8 में किसी कक्षा में 71 से 105 छात्र होंगे, तो 3 सेक्शन बनाए जाएंगे। सेक्शन तय करने के ये नॉर्म्स शिक्षा के मौलिक अधिकार के अनुसार है। पहले कक्षा छठी और आठवीं में किसी कक्षा में 50 छात्रों तक एक सेक्शन, 51-100 छात्रों तक 2 और 101 से 135 तीन सेक्शन बनाए जाते थे।
पीरियड में नहीं हुआ बदलाव
वहीं विषय वार साप्ताहिक पीरियड्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हिंदी, इंग्लिश, गणित, विज्ञान ,संस्कृत के लिए 6 -6 पीरियड्स प्रति सप्ताह निर्धारित किए गए हैं। पहले भी विषयवार साप्ताहिक इसी प्रकार निर्धारित थे। वहीं एक अध्यापक को सप्ताह में अधिकतम 36 पीरियड्स पढ़ाने होंगे।
किसी स्कूल में छठी, सातवीं और आठवीं कक्षाओं के एक-एक ही सेक्शन है, तो विज्ञान अध्यापक को गणित और विज्ञान ,संस्कृत अध्यापक को हिंदी और संस्कृत पढ़ाने होंगे। यदि किसी हाई स्कूल में किसी विषय के पीजीटी का रिक्त पद है तो नौवीं और दसवीं कक्षाओं वह विषय उसी विषय के टीजीटी को पढ़ाने होंगे, लेकिन सप्ताह में 36 से अधिक पीरियड्स का वर्कलोड नहीं होगा।
हरियाणा मास्टर वर्ग एसोसिएशन के प्रधान रमेश मलिक ने कहा कि एसोसिएशन की ओर से शुरू से ही शिक्षा के मौलिक अधिकार के अनुसार सेक्शन का आकार 35 छात्रों तक सीमित करने की मांग करती रही है। एसोसिएशन रेशनेलाइजेशन में मौलिक स्कूल मुख्याध्यापकों को भी शिक्षा के मौलिक अधिकार के अनुसार फुलटाइम करने की मांग करती है, ताकि संबंधित विषय के टीजीटी पर प्रभाव न पड़े।