जिला अदालत ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन यूटी एडमिनिस्ट्रेशन, डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर और सेक्टर-12 के गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल की प्रिंसिपल अमिता खन्ना को नोटिस जारी किया है। याचिका जिला अदालत के वकील शिव मूर्ति यादव ने दायर की है।
इसमें उन्होंने डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर (डीईओ) की उस नोटिफिकेशन पर रोक लगाने की अपील की है जिसके तहत चंडीगढ़ के आसपास के स्टूडेंट गवर्नमेंट स्कूल में एडमिशन नहीं ले सकते। उन्होंने कोर्ट से अपील की है कि एजुकेशन डिपार्टमेंट को जनता कॉलोनी, नया गांव के गरीब बच्चों को सेक्टर-12 के गवर्नमेंट मॉडल हाईस्कूल में एडमिशन देने के लिए आदेश जारी किया जाए। याचिका पर सिविल जज हरलीन पाल सिंह ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर 18 मई के लिए जवाब तलब किया है।
याचिका में यूटी शिक्षा विभाग की 31 दिसंबर 2015 को जारी नोटिफिकेशन को गैरकानूनी और भेदभावपूर्ण बताया है। इसमें कहा है कि सरकारी स्कूल सेक्टर-12 से जनता कालोनी केवल एक किमी दूर है। यूटी प्रशासन की नोटिफिकेशन के तहत प्राइमरी कक्षाओं में एक किमी के दायरे में रहने वाले बच्चों के एडमिशन को प्राथमिकता दी है, लेकिन वह भी तब जब वह चंडीगढ़ के निवासी हों।
याचिका में वकील का कहना है कि सेक्टर-12 के गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल में उनका बेटा 7वीं में पढ़ रहा है। अपनी साढ़े 3 साल की बेटी को भी इसी स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए वह गए थे। लेकिन वहां उनसे उनकी बच्ची को जनता कालोनी, नया गांव, मोहाली का निवासी बताकर एडमिशन देने से मना इंकार कर दिया। इसके लिए डीईओ की ओर से जारी निर्देशों का हवाला दिया गया।
याचिका में आरटीआई से मिली जानकारी को भी आधार बनाया है। जिसके मुताबिक इस स्कूल में प्री-प्राइमरी व प्राइमरी स्कूल में कई सीटें खाली पड़ी हैं। इसके बावजूद चंडीगढ़ के आसपास के एरिया के बच्चों को एडमिशन नहीं दी जा रही है। शिक्षा विभाग की इस कार्य प्रणाली को शिक्षा के अधिकार और शिक्षा के मौलिक अधिकार के भी खिलाफ बताया है।
उनका कहना है कि जनता कॉलोनी के 20 किमी के दायरे में मोहाली में कोई सरकारी मॉडल स्कूल नहीं है। इसलिए वहां रहने वाले बच्चों के लिए सबसे पास चंडीगढ़ के ही स्कूल हैं। लेकिन यूटी शिक्षा विभाग के इस रवैये के कारण उन्हें परेशानी हो रही है।