नशे के खिलाफ बैठक करते मुख्यमंत्री मनोहर लाल
हरियाणा सहित देश में अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर भाजपा सधी हुई रणनीति के तहत आगे बढ़ रही है। उत्तर भारत के राज्यों में नशे के बढ़ते प्रकोप का हर हाल में खात्मा करने का कार्ड भाजपा की ओर से खेल दिया गया है। इस समय पंजाब नशाखोरी से सबसे अधिक प्रभावित राज्य है। हरियाणा में भी नशा तस्करों का जाल तेजी से फैला है, हिमाचल प्रदेश भी इससे अछूता नहीं है।
चंडीगढ़, उत्तराखंड, दिल्ली व राजस्थान में नशाखोरी की समस्या इतनी गंभीर नहीं, जितनी पंजाब के बाद हरियाणा और हिमाचल में बनती जा रही है। पंजाब के बाद अब हरियाणा भी नशे की आग में जलना शुरू हो चुका है। पंजाब के साथ लगते बार्डर एरिया में बड़े पैमाने पर ड्रग्स के अलावा सिंथेटिक ड्रग्स की चपेट में युवा आ चुके हैं। हरियाणा की युवा पीढ़ी भी पंजाब की तरह नशे में डूबकर न रह जाए, इसे देखते हुए सीएम मनोहर लाल नशे के खिलाफ जंग में मुख्य भूमिका में आए हैं।
उन्होंने नशे के खिलाफ उत्तर भारत के राज्यों को न केवल एक मंच पर लाने का काम किया, बल्कि नशे के खिलाफ जंग को लेकर शुरू हुई क्रेडिट वार में भी बाजी मार गए। नशे के खात्मे के लिए रणनीति बनाने को बुलाई गई पहली क्षेत्रीय कांफ्रेंस की मेजबानी भी हरियाणा ने की। प्रदेश में इस समय भाजपा की सरकार है। हिमाचल, राजस्थान, उत्तराखंड भी भाजपा शासित राज्य हैं।
दिल्ली व पंजाब में ही आम आदमी पार्टी व कांग्रेस की सरकार है। पंजाब के राज्यपाल के नाते चंडीगढ़ के प्रशासक भूमिका राज्यपाल बीपी सिंह बदनौर निभा रहे हैं। उनकी पृष्ठभूमि भी भाजपा की रही है। ऐसे में नशे के खिलाफ जंग के ऐलान को सीधे तौर पर भाजपा का ही मास्टर प्लान माना जा सकता है।