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सीएम ने 'कुत्ते की पूंछ' से वर्करों को झिंझोड़ा

Tue, 11 Nov 2014 11:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सक्रिय सदस्यों को सक्रिय रखने के लिए 'कुत्ते की पूंछ' का सहारा लिया। हैरान न हों, 'कुत्ते की पूंछ' एक मछुआरे व राक्षस की कहानी है, जिसे सुनाते समय सीएम ने कहा, खाली आदमी परेशान कर सकता है। उन्होंने कहा, मछुआरा मछली पकड़ने गया तो कांटे में एक लौटा फंस गया। खोला तो उसमें धुएं के रूप में राक्षस निकला। बोला, मुझे आपने आजाद किया है। मैं नौकर बनकर काम करूंगा, लेकिन खाली होती ही तेरे को खा जाऊंगा।
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मछुआरे ने सभी काम करा लिए। राक्षस बोला कि मुझे काम दीजिए, नहीं तो आपको खा जाऊंगा। मछुआरे को कोई काम याद नहीं आया तो उसने एक कुत्ता मंगवाया और कहा कि इसकी पूंछ सीधी कर लो। जो कभी सीधी नहीं होती। जब काम होता तो करा लेता और फिर कहता पूंछ सीधी कर लो। इसलिए सक्रिय कार्यकर्ताओं भी काम लगाए रखना है, खाली नहीं रहने देगा।

प्रेमलता के पगफेरा

मंच पर केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह डूमरखां की पत्नी एवं उचाना कलां से विधायक प्रेमलता भी मौजूद थीं। प्रदेशाध्यक्ष रामबिलाश शर्मा ने कहा, प्रेमलता का विधानसभा में ऐसा पग फेरा हुआ कि बीरेंद्र सिंह 40 दिन में ही मंत्री बन गए।

स्क्रीन पर मोबाइल
पंडाल में बड़ी सक्रीन भी लगी हुई थी। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भीड़ आदि की तस्वीरें दिखाई जा रही थीं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जब मोबाइल पर सदस्यता ली तो उसे भी लाइव स्क्रीन पर दिखाया गया। मोबाइल पर मिस्ड कॉल और फिर वापस आए एसएमएस को भी दिखाया गया।
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खाली रह गई कुर्सी

कार्यकर्ताओं के लिए खूब कुर्सियां लगाई गईं। पूरा कार्यक्रम खत्म हो गया, लेकिन कुर्सी नहीं भर पाई। पीछे कई कुर्सियां खाली रह गई। कई कार्यकर्ताओं को समारोह स्थल तक नहीं पहुंचने दिया गया। यह सुरक्षा के लिहाज से किया गया।

स्वच्छता का संदेश
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने यहां भी स्वच्छता का संदेश दिया। अब तक चले अभियान को सराहा। कहा, सरकारी तंत्र और कार्यकर्ताओं ने अच्छा कार्य किया है। इसे आगे भी जारी रखना है।

मुख्यमंत्री से लेकर कर्मचारी तक की करो जांच
मुख्यमंत्री ने कहा, कार्यकर्ता इसकी जांच जरूर करें कि काम सही चल रहा है या नहीं। क्योंकि खुद की जांच कोई भी सही नहीं कर सकता। कर्मचारी ठीक काम कर रहा है या नहीं। मुख्यमंत्री, मंत्री और अधिकारी-कर्मचारी, कैसा काम कर रहे हैं। इसकी जांच कार्यकर्ता करें। ढिलाई मत बरतना। जनता के प्रतिनिधि हैं, जवाबदेही बनती है।
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