सौर ऊर्जा को बढ़ावा लेकिन बिजली बचत पर ध्यान नहीं
शहर में सौर ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है लेकिन बिजली बचत पर प्रशासन का ध्यान नहीं है। चंडीगढ़ में इस समय करीब 45 मेगावाट बिजली की उत्पादन सौर ऊर्जा से किया जा रहा है और अब 2023 तक 75 मेगावाट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दूसरी तरफ, ऊर्जा संरक्षण भवन कोड को लागू नहीं करके प्रशासन हर वर्ष 20-30 फीसदी बिजली बर्बाद कर रहा है। कोड के लागू होने के बाद शहर में बनने वाले सभी 100 किलोवाट से अधिक भार वाले नए व्यावसायिक भवनों में इसका पालन करना होगा। इसके तहत कई नियमों होंगे, जिसमें सोलर सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाना। खिड़की की साइज, कॉरिडोर में सेंसर समेत आदि कई बदलाव करने होंगे।
15-20 फीसदी बिजली की बचत होगी: सुरिंदर बाहगा
ईसीबीसी को लागू कराने के लिए प्रशासन के साथ काम करने वाले शहर के नामी आर्किटेक्ट सुरिंदर बाहगा ने बताया कि प्रशासन इसे लेकर गंभीर नहीं है। पड़ोसी राज्य पंजाब, हरियाणा, हिमाचल सहित 20 से अधिक राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने इन कोड को पहले ही अधिसूचित कर दिया है। प्रशासन को इसे जल्द लागू करना चाहिए। कहा कि इन नियमों को अगर थोड़ी ढिलाई के साथ भी लागू किया जाए तो हर वर्ष 15-20 फीसदी बिजली की बचत हो जाएगी।
लागू नहीं होने के पीछे कारण
- ईसीबीसी लागू करने की इच्छा शक्ति की कमी
- प्रशासन के पास इस काम के लिए प्रोफेशनल की कमी
- सोलर पर ध्यान लेकिन बिजली बचत पर गंभीरता की कमी
- आज तक प्रोसीजर ही नहीं बना पाया प्रशासन
- सॉफ्टवेयर महंगे हैं
ऊर्जा संरक्षण भवन कोड के फायदे
- हर वर्ष 20-30 फीसदी बिजली की बचत
- ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम होगा
- ऊर्जा की मांग घटेगी
- वातावरण खराब नहीं होगा
चंडीगढ़ में जो भी इमारतें बनती हैं, उनके लिए कई तरह के नियम तय किए गए हैं। उनको पूरा करने के बाद ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट दिया जाता है। ऊर्जा संरक्षण भवन कोड (ईसीबीसी) का अगर ड्राफ्ट बन गया है तो जल्द ही इसे लागू किया जाएगा। - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक।