28 साल से क्यों जारी नहीं हुआ नया टेंडर
इस पूरे मामले में अस्पताल और विभाग के वर्तमान व पूर्व अधिकारियों की भूमिका पता लगाने के लिए मामला विजिलेंस को सौंपा गया है। विजिलेंस जांच कर रही है कि 28 वर्षों से कभी नया टेंडर जारी क्यों नहीं हुआ। पुराने टेंडर को ही बार-बार बिना किसी ठोस कारण के आगे क्यों बढ़ाया जाता रहा। जिस नीति के तहत एक्सटेंशन मिला, जब वो नीति केमिस्ट की दुकानों के लिए थी ही नहीं, फिर क्यों ऐसा किया गया।
जांच में स्वास्थ्य विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों पर गाज गिर सकती है क्योंकि सूत्रों के अनुसार जिस नीति के तहत इस केमिस्ट की दुकान को एक्सटेंशन दी जा रही थी वह नीति स्वास्थ्य विभाग के केमिस्ट शॉप के आवंटन की थी ही नहीं। एस्टेट ऑफिस ने इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग को जानकारी दी है। इसके अलावा वर्ष 1993 में जब दुकान आवंटित की गई तो उसमें एक्सटेंशन का जिक्र भी नहीं था। बावजूद इसके हर साल एक्सटेंशन दी जाती रही। विजिलेंस विभाग ने दिसंबर 2022 में एक जांच शुरू की थी कि कैसे केमिस्ट दुकान के संचालक ने वर्षों तक अवैध कब्जा करके रखा। इसके बाद स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने जब विभागीय जांच कराई तो इसमें कई झोल पाए गए, जिसके बाद विजिलेंस विभाग से अफसरों की संलिप्तता पर जांच कराने का फैसला लिया गया है।