पंजाब विजिलेंस की रिपोर्ट में शिक्षक भर्ती घोटाले के उजागर होने पर यूटी प्रशासन ने जांच के लिए यूटी पुलिस की एसआईटी बनाई थी। तत्कालीन एसपी रवि कुमार के नेतृत्व में एसईआटी ने मामले की जांच की।
इसके बाद यूटी पुलिस ने 29 जुलाई 2016 को मामले में केस दर्ज किया। एसआईटी ने पंजाब विजिलेंस की ओर से गिरफ्तार दिनेश कुमार यादव और प्रदीप लोचन को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर चार दिन का रिमांड लेकर पूछताछ की थी।
इसके बाद पुलिस टीमों ने छापेमारी कर मामले के एक अन्य आरोपी सोनीपत निवासी बृजेंद्र नैन को हरियाणा के भिवानी से गिरफ्तार किया था। पूछताछ में अहम तथ्य हाथ लगने पर एसआईटी ने कई सरकारी टीचरों समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
पंजाब पुलिस ने 17 मई को तेलंगाना पुलिस की मदद से संजय श्रीवास्तव उर्फ मिथिलेश पांडेय और शिव बहादुर को गिरफ्तार किया था। भर्ती घोटाले में दर्ज एफआईआर में सरकारी व गैर सरकारी करीब 49 लोगों को नामजद किया गया था।
30 मई 2018 को नौकरी से हटाने के आदेश
यूटी शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया में धांधली होने पर यूटी प्रशासक को पूरी भर्ती निरस्त किए जाने के लिए लिखा था। इस मामले में गठित कमेटी ने सभी 850 शिक्षकों की नौकरी समाप्त करने की सिफारिश की। इसके बाद 30 मई 2018 को 850 शिक्षकों की नौकरी समाप्त करने के आदेश जारी किए गए, लेकिन शिक्षकों ने यूटी प्रशासन के आदेश के खिलाफ अदालत से स्टे ले लिया था।