चंडीगढ़ के खिलाड़ियों को लगभग 40 वर्षों बाद मंगलवार को खेल पॉलिसी मिल ही गई। इसके साथ ही पहला अंतरराष्ट्रीय स्तर का सिंथेटिक ट्रैक भी शहर के एथलीटों को समर्पित कर दिया गया।
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सेक्टर 7 स्थित स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में मंगलवार को पंजाब के राज्यपाल और यूटी के प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित ने खिलाड़ियों के सामने खेल पॉलिसी को सार्वजनिक किया। इसके बाद सिंथेटिक ट्रैक का उद्धाटन किया। इस मौके पर राज्यपाल के साथ यूटी के एडवाइजर धर्मपाल, यूटी पुलिस के डीजीपी प्रवीर रंजन, चंडीगढ़ स्पोर्ट्स कमेटी प्रधान संजय टंडन, मेयर अनूप गुप्ता, स्पोर्ट्स सेक्रेटरी नितिन यादव, यूटी खेल निदेशक सौरभ अरोड़ा के साथ यूटी खेल विभाग के सभी खेलों के कोच,स्टाफ और एथलेटिक्स के खिलाड़ी मौजूद रहे।
नई नीति के तहत, ओलंपिक/पैरालंपिक खेलों के स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक विजेताओं को क्रमशः 6 करोड़ रुपये, 4 करोड़ रुपये और 2.50 करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। वहीं, अन्य टूर्नामेंटों में शहर और देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को भी विभिन्न श्रेणियों के तहत नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। हालांकि, खेल कोटा के तहत नौकरियां कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुसार दी जाएंगी। नई खेल नीति में हरियाणा और पंजाब से दोगुना पुरस्कार देने का फैसला किया है।
प्रशिक्षकों को नकद पुरस्कार
पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के कोचों को उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और प्रतिबद्धता के सम्मान में नकद पुरस्कार दिया जाएगा। प्रशिक्षकों को अंतरराज्यीय/अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान कार्यक्रम, सेमिनार और वार्ता आयोजित कर नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा। विभाग ने यूटी की ओर से आयोजित अंतर-स्कूल प्रतियोगिता, स्थानीय खेल संघों द्वारा आयोजित मिनी, सब-जूनियर और जूनियर चैंपियनशिप में पहले तीन स्थान धारकों के लिए वार्षिक छात्रवृत्ति भी बढ़ा दी है। खेल नीति में खिलाड़ियों को मिलने वाली स्कॉलरशिप को 10 गुना बढ़ा दिया गया है। पहले खिलाड़ियों को सिर्फ साल के 5000 रुपये ही मिलते थे, लेकिन अब स्कॉलरशिप के रूप में 50 हजार रुपये मिलेंगे।