चंडीगढ़ के सरकारी अस्पतालों में जेनेरिक दवाएं लिखने के लिए आदेश पर आदेश जारी किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत चौंकाने वाली है। जेनेरिक दवाओं की कमी के कारण जीएमसीएच- 32 के जन औषधि केंद्र का शटर सोमवार को बंद हो गया।
सस्ती दवा खरीदने की उम्मीद में आए मरीजों को निराश होकर जन औषधि केंद्र के बगल की मेडिकल शॉप से ब्रांडेड दवा खरीदनी पड़ी, लेकिन अस्पताल प्रशासन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उनकी तरफ से डॉक्टरों को जेनेरिक दवाएं लिखने का निर्देश देकर अपना पल्ला झाड़ लिया गया है।
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स्थिति यह है कि जीएमसीएच-32 की वेबसाइट पर लगभग 500 जेनेरिक दवाओं की लिस्ट जारी की गई है, लेकिन वास्तविकता यह है कि उनमें से 50 भी उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर परेशान हैं क्योंकि वे मरीजों को ब्रांडेड दवाएं नहीं लिख सकते। वहीं जेनरिक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में दवाओं के बिना मरीजों का इलाज प्रभावित होने लगा है। डॉक्टर दबी जुबान में यहां तक कह रहे हैं कि अगर यही हाल रहा तो सरकारी अस्पतालों में नौकरी करना मुश्किल हो जाएगा।
तीन साल बाद खुली थी दुकान
जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 की जन औषधि केंद्र लगभग तीन साल के बाद कुछ महीने पहले ही खुले हैं। रेडक्रॉस के तहत संचालित ये दुकान कोविड के पहले बंद हुई थी। लेकिन किसी न किसी समस्या के कारण उसे दोबारा नहीं खोला जा पा रहा था। स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने प्रयास कर दोनों अस्पतालों की जन औषधि केंद्र को दोबारा संचालित कराया, लेकिन चंद महीनों के बाद ही दवाओं की कमी इसके संचालन में बाधा बनने लगा है।
पीजीआई का शोध जेनेरिक दवाएं कम असरदार
चौंकाने वाली बात यह है कि जिन जेनेरिक दवा के प्रयोग को लेकर आदेश पर आदेश जारी किए जा रहे हैं उसके असर को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पीजीआई के विशेषज्ञों की ओर से फेफड़े के मरीजों पर किए गए शोध में पता चला है कि ब्रांडेड दवाओं का जहां मरीज पर 73 प्रतिशत प्रभाव पड़ा है वहीं जेनेरिक दवाएं महज 29 प्रतिशत कारगर पाई गई हैं। इस शोध में 94 जेनेरिक और 99 इनोवेटर या ब्रांडेड को शामिल किया गया था। विशेषज्ञों ने 193 मरीजों को शामिल किया और उनमें से 48.7 प्रतिशत को जेनेरिक और 51.3 प्रतिशत को ब्रांडेड दवाएं दीं। दो सप्ताह के बाद मरीजों पर दवाओं के प्रभाव का आकलन किया गया, जिसमें जेनेरिक दवाएं कमतर पाई गईं।
जन औषधि केंद्र पर दवा की कमी से यह बात साफ हो रही है कि अस्पतालों में जेनेरिक दवाएं लिखने के लिए जारी किए गए आदेश का पालन होने लगा है। जहां तक जेनेरिक दवाओं की कमी की बात है तो इस संबंध में दिल्ली में बात कर आपूर्ति शीघ्र सुनिश्चित कराई जाएगी।
- यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव