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तीन दिन हड़ताल, बिजली विभाग ने शहर को अपने हाल पर छोड़ा

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चंडीगढ़। बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ विभाग के कर्मचारियों ने 22 से 24 फरवरी तक तीन दिन हड़ताल की घोषणा की है। इस दौरान अगर बिजली गई तो ठीक करने वाले हड़ताल खत्म होने के बाद ही आएंगे। ऐसी स्थिति से बचने के लिए लोगों को खुद ही कोई व्यवस्था करनी होगी, क्योंकि प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए हैं और लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। बिजली विभाग ने नोटिस जारी कर कहा है कि लोग अपने स्तर पर ही अतिरिक्त उपयुक्त व्यवस्था रखें।
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बिजली कर्मचारी 21 फरवरी की रात 12 बजे से 72 घंटे की हड़ताल पर रहेंगे। प्रशासन ने कर्मचारियों को नहीं मनाया तो 72 घंटे की हड़ताल से पूरा शहर प्रभावित होगा। मूलभूत चीजों के लिए शहरवासी परेशान होंगे। खासकर पानी के लिए। यदि बिजली चली गई तो पानी की आपूर्ति भी प्रभावित होगी। बिजली कर्मचारियों को राजनीतिक दलों के साथ साथ शहर के रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अलावा पेंडू संघर्ष कमेटी व किसान संगठनों का साथ मिला है। हड़ताली कर्मचारी 22 फरवरी को कामकाज छोड़ सेक्टर-17 के परेड ग्राउंड के साथ लगते ग्राउंड में विशाल रैली भी करेंगे। इस हड़ताल को लेकर इलेक्ट्रिसिटी ओपी सब डिवीजन नंबर-सात की तरफ से सेक्टर-34 की भी कई बिल्डिंगों पर नोटिस चिपकाए गए हैं। नोटिस में बिजली विभाग के कर्मचारियों की तरफ से 22 से 24 फरवरी के बीच घोषित हड़ताल की जानकारी दी गई है। कहा गया है कि इस दौरान लोगों से आग्रह किया जाता है कि वह बिजली की अतिरिक्त उपयुक्त व्यवस्था अपने स्तर पर करके रखें। लिखा है, हालांकि विभाग की तरफ से कोशिश की जाएगी कि हड़ताल के दौरान बिजली की आपूर्ति को जारी रखा जाए, लेकिन अगर ब्रेकडाउन होता है, या फॉल्ट आता है तो इसे ठीक करने में काफी समय लग सकता है क्योंकि सभी कर्मचारी हड़ताल पर होंगे। ऐसे में लोगों को पहले से तैयार रहना चाहिए।
प्रशासन के पास बैकअप योजना नहीं, इनवर्टर से कितना समय गुजरेगा
बिजली कर्मी जब-जब हड़ताल पर जाते हैं, बिजली संकट पैदा हो जाता है। इस बार भी प्रशासन ने खुद कोई व्यवस्था नहीं की, बल्कि लोगों पर जिम्मेदारी डाल दी। इस पर लोगों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कॉमर्शियल उपभोक्ता किसी तरह जनरेटर आदि की मदद से अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था कर सकते हैं, लेकिन घरेलू उपभोक्ता कैसे करेगा। हड़ताल के दौरान बिजली जाती है, तो ज्यादा से ज्यादा 8-10 घंटे इनवर्टर पर काम चल सकता है, लेकिन उसके बाद। अगर एक दिन भी बिजली जाती है तो पीने के पानी का भी संकट पैदा हो सकता है। इसके अलावा बच्चों की कक्षाएं, पीयू की परीक्षाएं, वर्क फ्रॉम होम समेत सब कुछ प्रभावित हो सकता है। उन लोगों को ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा, जो कोरोना संक्रमित हैं और होम आइसोलेशन में हैं। प्रशासन को पता है कि कर्मचारी हड़ताल पर जा रहे हैं, लेकिन विभाग के पास कोई बैकअप योजना नहीं है, जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ सकता है।
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एक फरवरी को हुई थी एक दिन की हड़ताल, मच गया था हाहाकार
बिजली विभाग के निजीकरण की वजह से एक फरवरी को भी कर्मचारियों ने हड़ताल की थी। पूरे दिन लोगों को परेशान होना पड़ा था। शहर के कई हिस्सों में बिजली 20 से 24 घंटे तक गुल रही। लोग भड़क कर शिकायत केंद्र न पहुंच जाएं, इसे लेकर 13 केंद्रों पर पुलिस भी तैनात कर दी गई थी। बिजली जाने के बाद पूरे दिन लोग बिजली विभाग के हेल्पलाइन नंबरों पर कॉल करते रहे, लेकिन नंबर ही नहीं मिले। अगर नंबर मिला भी तो किसी ने उठाया नहीं। लोग पूरे दिन परेशान हुए, लेकिन विभाग की तरफ से लोगों को कोई जवाब नहीं मिला कि बिजली कब आएगी।
ये हैं मुख्य मांगें
- बिजली विभाग का निजीकरण रोका जाए
- मशीनरी, बिल्डिंग और जमीन की कीमत तय कर आडिट कराया जाए
- जिस निजी कंपनी को बिजली विभाग सौंपा जा रहा है, उसके पांच वर्षों के प्रदर्शन की जांच की जाए
- बिजली कर्मचारियों का सरकारी दर्जा बहाल रखा जाए
कोटस ...
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल अटल
निजीकरण के विरोध में हड़ताल पर जा रहे हैं। ये हड़ताल अटल है। तीन दिनों की हड़ताल में शहर के लोगों को होने वाली परेशानियों के लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा। कर्मचारियों की बात नहीं सुनी जा रही है। निजीकरण पूर्ण तौर पर गैर कानूनी है। हड़ताल के अलावा कोई चारा नहीं है। सरकारी कर्मचारी को निजी कर्मचारी कैसे बना सकते हैं।
- गोपाल दत्त जोशी, महासचिव, यूटी पावर मैन यूनियन
सोमवार को करेंगे बैठक
बिजली कर्मचारियों की अधिकतर मांगें यथार्थवादी नहीं हैं। हड़ताल 22 से शुरू होगी। सोमवार को बैठक में इस पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। अगर हड़ताल होती है तो प्रशासन की कोशिश रहेगी कि इससे लोगों को कोई परेशानी न हो।
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- सीबी ओझा, चीफ इंजीनियर, यूटी प्रशासन
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