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प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी, एक्ट तो हैं पर लागू नहीं

Mon, 14 Dec 2015 03:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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इलाज के नाम पर पैसा वसूलने वाले प्राइवेट अस्पतालों पर लगाम लगाने के लिए एक्ट तो है, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया। केंद्र सरकार ने मार्च 2012 में क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट बिल को नोटिफाई किया था। पहले चरण में अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, सिक्किम सहित सभी केंद्र शासित प्रदेश में लागू करने के निर्देश जारी हुए थे। इनमें चंडीगढ़ भी शामिल था।
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तीन साल से ज्यादा वक्त बीत चुका है, लेकिन अब तक चंडीगढ़ में क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू नहीं हो पाया। समय-समय पर इसे लागू करने की मांग होती रही है, लेकिन तकनीकी कारणों के कारण इसे लागू नहीं कर पाया गया। चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग की ओर से पिछले कुछ महीनों से इसे लागू करने के लिए कुछ कदम उठाए गए हैं, लेकिन फिलहाल सफलता नहीं मिल पाई है।

क्या है क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट
इस एक्ट के लागू होने पर सभी प्राइवेट हास्पिटल्स व लेबोट्ररी एक कानून के दायरे में आ जाएंगी। एक्ट के तहत प्राइवेट हास्पिटल्स, नर्सिंग होम, लेबोट्ररी और पैथोलाजी सेंटर को डिस्ट्रिक्ट रजिस्टरिंग अथॉरिटी (डीआरए) से पंजीकरण कराना जरूरी होगा। हर पांच साल बाद पंजीकरण को रिन्यू कराना होगा।
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शिकायत मिलने पर डिस्ट्रिक्ट अथॉरिटी अपने स्तर पर किसी भी मामले की जांच भी कर सकती है। जांच में सहयोग नहीं देने और झूठी सूचना देने पर पांच लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान भी है। इस एक्ट का मकसद मरीजों को इलाज का एक स्टैंडर्ड बनाना है। डीआरए कभी भी पंजीकृत संस्थान की जांच-पड़ताल कर सकेगा।

पेशेंट के लिए कितना फायदेमंद होगा
1.प्राइवेट हास्पिटल्स को अपनी फीस सहित सभी रेट डिसप्ले करने होंगे।
2.पहले से रेट पता होने से पेशेंट को अपनी बीमारी के खर्च का एक ओवर व्यू मिल सकेगा।
3.दूसरे हास्पिटल्स के रेट से तुलनात्मक अध्ययन करना आसान होगा।
4.हास्पिटल्स में कौन-कौन सी सुविधाएं है, बोर्ड में यह भी लिखना जरूरी होगा
5.हास्पिटल्स में सभी क्वालिफाई पैरामेडिकल स्टाफ नियुक्त करना होंगे
6.पेशेंट को क्वालिटी और सुरक्षित इलाज मिलेगा
7.यदि पेशेंट कोई जानकारी मांगता है तो अस्पताल को हर हाल में देनी होगी
8.डाक्टर इमरजेंसी की स्थिति में किसी मरीज का इलाज करने से मना नहीं कर सकते।
9.अस्पताल को सभी मरीज का रिकार्ड भी रखना होगा

क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट को हर हालत में लागू करना चाहिए। इस एक्ट में बहुत कुछ कवर होता है। प्राइवेट हास्पिटल्स की जवाबदेही तय होती है। रेट लिस्ट जानने के बाद मरीजों पर इलाज के खर्च का कोई मनोवैज्ञानिक दबाव नहीं होता है, लेकिन प्रशासन को इसे जल्द से जल्द लागू कराना चाहिए। तीन साल पहले इसकी नोटिफिकेशन जारी हो चुकी है।
- आरके गर्ग, आरटीआई एक्टिविस्ट

एक्ट को लागू करने में चंडीगढ़ में कुछ तकनीकी अड़चने हैं। इसके लिए मेडिकल काउंसिल का होना जरूरी है। चंडीगढ़ की अपनी कोई मेडिकल काउंसिल नहीं है। इसलिए हमने मांग की है कि हमें पंजाब मेडिकल काउंसिल से प्रतिनिधि दिया जाए। इस बारे में पत्र लिखा जा चुका है। हमारी कोशिश है कि इसे जल्द से जल्द लागू करें।
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- डॉ.वीके गगनेजा, डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज चंडीगढ़
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