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अच्छी पहल: कर्मचारियों के सुख-दुख का साथी है पीजीआई कर्मचारी संघ, देता है हर कदम पर साथ

Thu, 09 Sep 2021 04:29 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ 

सार

कर्मचारी के परिजनों को बिना मृत्यु प्रमाण पत्र का इंतजार किए एक लाख पांच हजार रुपये का चेक दे दिया जाता है। वहीं, शादियों में 1100 रुपये शगुन के रूप में भी संघ कर्मचारियों को देता है। योजना के लिए प्रत्येक कर्मचारी से 100 रुपये प्रति माह लिए जाते हैं।
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चंडीगढ़ पीजीआई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ पीजीआई कर्मचारी संघ गैर संकाय अपने कर्मचारियों के हितों की रक्षा तो करता ही है, साथ ही उनके सुख-दुख में भी हमेशा खड़ा रहता है। इसके लिए संघ की कर्मचारी कल्याण निधि योजना संचालित की जा रही है। इसके तहत संघ में पंजीकृत कर्मचारियों की मृत्यु, सेवानिवृत्ति और घर के मांगलिक कार्यों में आर्थिक मदद की जाती है। इसके लिए न कर्मचारी और न ही परिवार को चक्कर लगाना पड़ता है। किसी हादसे के कुछ घंटे बाद ही बिना किसी पड़ताल के आर्थिक मदद कर्मचारी के परिजनों तक पहुंच जाती है।
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संघ के अध्यक्ष अश्वनी कुमार मुंजाल ने 1997 में जेल में इस अनुदान योजना की परिकल्पना तैयार की थी। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों के लिए कोई ऐसी योजना नहीं थी जिसमें संकट की स्थिति में उसके न होने पर परिवार को मदद मिल पाए। कर्मचारी की मौत पर सरकारी मदद के लिए कागजी कार्रवाई में ही काफी समय गुजर जाता है। इस दौरान योजना की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। 


कर्मचारी के परिजनों को बिना मृत्यु प्रमाण पत्र का इंतजार किए एक लाख पांच हजार रुपये का चेक दे दिया जाता है। वहीं, शादियों में 1100 रुपये शगुन के रूप में भी संघ कर्मचारियों को देता है। योजना के लिए प्रत्येक कर्मचारी से 100 रुपये प्रति माह लिए जाते हैं। सेवानिवृत्त होने पर कर्मचारी को जमा पूंजी को वापस दे दी जाती है। यूनियन की गतिविधियों में इस राशि का उपयोग नहीं किया जाता।
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महत्वपूर्ण तथ्य
  • 1900 सदस्य हैं मौजूदा समय में संघ के 
  • 1600 सदस्य अनुदान योजना में शामिल
  • 70 लाख रुपये जमा है अनुदान के बैंक खाते में
  • 01 लाख रुपये है आश्रितों को दी जाने वाली राशि
  • 02 लाख रुपये सहायता राशि देने की योजना बन रही
  • 170 कर्मचारियों को मिल चुका है योजना का लाभ
  • 12 करोड़ रुपये पहुंच चुका है उनके खाते में
  • 143 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को वापस मिल चुकी है उनकी जमा पुंजी
  • 70 लाख रुपये सेवानिवृत्त कर्मचारियों के खाते में जा चुका है 
  • 05 लाख रुपये शादियों में जा चुका है शगुन के रूप में
अनुदान की राशि 15 से 100 तक पहुंची
  • 1998 में 15 रुपये
  • 2002 में 25 रुपये
  • 2006 में 40 रुपये
  • 2008 में 60 रुपये
  • 2012 में 100 रुपये

संघ के प्रत्येक सदस्य के साथ पारिवारिक रिश्ता जुड़ चुका है। ऐसे में संघ यह प्रयास करता रहता है कि कर्मचारियों के हित में कार्य किए जाएं। पीजीआई में ठेकेदारी प्रथा के तहत कार्यरत कर्मचारियों को इस लाभ से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। -अश्वनी कुमार मुंजाल, अध्यक्ष पीजीआई कर्मचारी संघ गैर संकाय

 
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