बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नारे हर गली मोहल्ले की दीवार पर पढ़ने को मिल जाते हैं या फिर आम लोग ये दम भी भर रहे हों कि वे बेटा-बेटी में कोई अंतर नहीं रखते, इसके बावजूद समाज में बहुत से लोग हैं जो बेटों को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन बेटियां हर क्षेत्र में आसमान छू रही हैं, इसमें कोई शक नहीं। इस धारणा को बदलने की अनूठी पहल की है चंडीगढ़ के एनजीओ सराथ्री ने।
आपके घर में बिटिया का जन्म हुआ है तो मां के कमरे में खुशियों के रंग अब ट्राईसिटी का एनजीओ सराथ्री भर देगा। अब तक यह एनजीओ पच्चीस बेटियों के जन्म पर मां के कमरे को पेंट करने के अलावा उसे कलर थीम से सजा चुका है।
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एनजीओ सराथ्री के फाउंडर डायरेक्टर शिव चंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने एनजीओ को वर्ष 2022 में दिवाली के त्योहार पर लांच किया था। एनजीओ की शुरुआत का था उद्देश्य बेटियों के जन्म के समय खुशियां बांटना। उन्होंने कहा कि आमतौर पर देखा जाता है कि बेटों के जन्म लेने पर घर में काफी खुशियां मनाई जाती हैं। जबकि बेटियों के जन्म पर काफी संख्या में लोग ऐसे हैं जो ऐसा नहीं करते हैं। उनका उद्देश्य ऐसे ही परिवारों में बेटियों के लिए अच्छी भावनाओं का संचार करना है। उन्होंने कहा कि वास्तव में बेटियां तो बेटों से ज्यादा जिम्मेदार होती हैं और आज हर क्षेत्र में बेटियां अलग मुकाम हासिल कर रही हैं। इसी वजह से उन्होंने यह पहल की है।
शिव चंदर सिंह ने बताया कि उनकी 20-25 स्वयंसेवियों की टीम है। अब तक उनकी टीम ने पच्चीस ऐसे परिवारों में मां के कमरे को पेंट किया है, जिनमें बेटियां जन्मी हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों ने बेटियों के लिए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना चलाई है, जिसके माध्यम से सरकार चाहती है कि बेटियां पढ़ें लिखे और समाज को नई दिशा दें।
खुशहाली की थीम के साथ करते हैं पेंट
सराथ्री के सदस्य अनिल ने बताया कि उनकी टीम मां के कमरे को पेंट करते समय लाइट मूड थीम का प्रयोग करती है। जिससे मां का कमरा शानदार बन जाए। उन्होंने कहा कि बेटियों के जन्म से लेकर तीन माह के होने के पहले कोई भी उनसे संपर्क कर सकता है।
एक कमरे के रंग रोगन पर करीब 12 हजार रुपये का खर्च
सराथ्री के फाउंडर शिव चंदर सिंह ने बताया कि एक कमरे का पेंट करने में उनका करीब 12 से पंद्रह हजार रुपये तक का खर्च आता है। इसके लिए फिलहाल वह अपने फंड से ही काम चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेंट के लिए ब्रांडेड कंपनियों के पेंट का इस्तेमाल ही किया जाता है।
सोशल प्लेटफार्म से मिलते हैं ऐसे लोग
सराथ्री के फाउंडर शिव चंदर सिंह ने बताया कि इस मुहिम के लिए जागरूकता फैलाने के लिए सोशल प्लेटफार्म के माध्यम से जागरूकता फैलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही कुछ लोग सीधे भी उनसे संपर्क कर लेते हैं। इसके लिए कोई भी संस्था के नंबर 9877758533 पर या सराथ्री का एप डाउनलोड कर संपर्क कर सकता है।