उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ की रहने वाली सुशीला देवी को लिवर संबंधी परेशानी है। उनका कई साल से पीजीआई में इलाज चल रहा है। अचानक तबीयत बिगड़ी तो एक महीने पहले चंडीगढ़ में रहने वाले अपने रिश्तेदार के घर आ गईं। पहले तो काफी दिन तक नंबर नहीं लगा। 10 दिन बाद नंबर लगा, 18वें दिन कॉल आई और डॉक्टर ने कुछ जांच लिखी।
28वें दिन डॉक्टर ने देखा और दवा लिख दी। इसके बाद सुशीला अपने घर लौट सकी हैं। सुशीला का कहना है कि फॉलोअप में दिखाने में एक महीने लग गए। उनका कहना है कि मरीजों की परेशानी को देखते हुए सरकार को अब सभी अस्पतालों की ओपीडी खोल देनी चाहिए।
तत्काल इलाज नहीं मिलने से बिगड़ रही हालत
बिहार के पटना के रहने वाले अखिलेश कुमार को किडनी संबंधी बीमारी है। हालत बिगड़ने पर पटना से रेफर होकर पांच दिन पहले पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचे। इमरजेंसी से यह कहकर लौटा दिया गया कि पहले टेली कंसल्टेशन से पंजीकरण कराएं। अखिलेश को पटना से रेफर होने के बाद लगा था कि पीजीआई में तत्काल इलाज मिलेगा लेकिन चार दिनों से सुबह 8 से 9.30 बजे तक पीजीआई के नंबरों पर कॉल कर रहे हैं।
बीते गुरुवार को नंबर लगा तो बताया गया कि पंजीकरण कर लिया गया है। अब किडनी के डॉक्टर से तय दिन पर कॉल कर बात कर लें। अखिलेश ने कहा कि इलाज की उम्मीद में वे परिवार से बड़ी दूर आए हैं लेकिन यहां इलाज तो क्या होना चक्कर में फंसा दिया। तत्काल इलाज न मिलने से उनकी हालत बिगड़ती जा रही है।
- राज्य कुल मरीज प्रतिशत
- पंजाब 1092993 38.5
- हरियाणा 526506 18.6
- चंडीगढ़ 505315 17.8
- हिमाचल 371540 13.1
- उत्तर प्रदेश 127358 4.5
- जम्मू कश्मीर 81827 2.9
- उत्तराखंड 29429 1.0
- अन्य राज्य 101312 3.6
- कुल 2836282 100
नोट -पीजीआई के साल 2019-20 के आंकड़े
ओपीडी कब तक शुरू होगी, इस बारे में अभी कुछ तय नहीं है लेकिन प्रयास किया जा रहा है कि जल्द से जल्द सभी सेवाएं फिर से बहाल कर दी जाएं। प्रो. जगतराम, पीजीआई निदेशक।
ओपीडी शुरू करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। जहां तक नंबर नहीं लगने की बात है तो इसकी संख्या बढ़ा दी गई है। पीजीआई की पूरी कोशिश है कि मरीजों को जल्द और बेहतर इलाज मिले। - डॉ. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता।