ली कार्बूजिए और पियरे जेनरे द्वारा निर्मित हेरिटेज फर्नीचर ने चंडीगढ़ को दुनिया भर में नई पहचान दी है लेकिन अपने ही घर में करोड़ों रुपये के हेरिटेज फर्नीचर की कद्र करने वाला कोई नहीं है। यूटी सचिवालय में प्रशासक के सलाहकार समेत तमाम अधिकारी बैठते हैं लेकिन प्रेस रूम के सामने खुले में पड़े हेरिटेज फर्नीचर की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। अगर इधर नजर दौड़ाई गई होती तो शहर के इस धरोहर की ऐसी हालत नहीं होती।
जानकारी के अनुसार करोड़ों रुपये का यह हेरिटेज फर्नीचर यहां कई महीनों से फेंके हुए हैं। बीते साल शहर की हेरिटेज कमेटी ने दौरा किया था और पाया कि खुले में कबाड़ की तरह पड़ा यह फर्नीचर हेरिटेज है। इसे तुरंत बचाने की जरूरत है। हेरिटेज कमेटी ने प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वह इनको बचाने के लिए एक शेड का निर्माण करें। यदि यह नहीं कर सकते तो तत्काल तिरपाल ही डाला जाए ताकि बारिश और धूप में खराब होने से इन हेरिटेज फर्नीचर को बचाया जा सके। हेरिटेज कमेटी के निर्देश के बावजूद प्रशासन ने हेरिटेज फर्नीचर को बचाने के लिए कुछ नहीं किया। अनदेखी के कारण काफी कुर्सियां और स्टडी टेबल खराब हो चुकी हैं। इस मामले में चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों की लापरवाही पर कोई जवाब तलब करने वाला नहीं है।
यहां के मलबे को हटाना चाहिए क्योंकि गंदगी और पानी जमा होने की वजह से कई बीमारियां हो सकती हैं। गर्मियों में एसी का पानी गिरता है, जिसकी वजह से मच्छर हो जाते हैं। सामान के लिए स्टोर होना चाहिए, वहां यह रखा जाना चाहिए। - बलविंदर सिंह, प्रेसिडेंट, चंडीगढ़ सबॉर्डिनेट सर्विसेज फेडरेशन (यूटी)