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कोरोना का घाटा: चंडीगढ़ ने 40 ई-बसें खरीद का प्रस्ताव टाला तो केंद्र ने 80 का दिया तोहफा

Fri, 25 Sep 2020 09:26 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • फेम इंडिया योजना के तहत केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ के लिए 80 ई-बसों की दी स्वीकृति
  • बीते महीने चंडीगढ़ प्रशासन ने खुद से 40 ई-बसों को खरीदने के प्रस्ताव को टाल दिया था
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सीटीयू बसें। - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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विस्तार
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कोरोना वायरस ने चंडीगढ़ के सरकारी खजाने को काफी प्रभावित किया है। बीते महीने यूटी प्रशासन ने 40 इलेक्ट्रिक बसों को खरीदने के प्रस्ताव को टाल दिया था लेकिन अब केंद्र सरकार चंडीगढ़ को 80 इलेक्ट्रिक बसें देगा। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शुक्रवार को फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी फेम इंडिया स्कीम फेज-दो के तहत उन शहरों के नामों की घोषणा की, जिन्हें केंद्र सरकार की तरफ से ई-बसें दी जाएंगी। 

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केंद्रीय मंत्री की ओर से चंडीगढ़ को 80 इलेक्ट्रिक बसें देने के एलान के बाद प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने ट्वीट कर उनको धन्यवाद दिया। इसके अलावा सांसद किरण खेर ने ट्वीट कर कहा कि देश में पर्यावरण प्रदूषण और ईंधन जैसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र की मोदी सरकार की ओर से इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाली फेम इंडिया स्कीम के तहत चंडीगढ़ शहर को 80 इलेक्ट्रिक बसों का काफिला मिला है। खेर ने इसके साथ ही केंद्र सरकार का शुक्रिया अदा किया है। दरअसल, सरकार की योजना ‘फेम इंडिया’ के तहत साल 2022 तक देश को पॉल्यूशन मुक्त बनाने की है।

अगस्त में प्रशासन ने प्रस्ताव को टाला था
प्रशासन ने फंड की कमी को देखते हुए बीते महीने 40 इलेक्ट्रिक बसों को खरीदने के प्रस्ताव को टाल दिया था। सीटीयू के प्रस्ताव के तहत शहर में डीजल से चलने वाली बसों को हटाकर केवल इलेक्ट्रिक बसों को चलाना था। इस प्रस्ताव के पहले फेज में 40 इलेक्ट्रिक बसें खरीदनी थीं। शहर में 40 इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लिए चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट विभाग की तरफ से इस वर्ष के शुरुआत में टेंडर किया गया था। 
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दो कंपनियों ने आवेदन भी किया। एक कंपनी ने 64 रुपये प्रति किमी तो दूसरे ने 67 रुपये प्रति किमी में बस चलाने के लिए प्रस्ताव दिया था। हालांकि, सीटीयू को यह रेट पसंद नहीं आए, इसलिए दोबारा टेंडर करने का फैसला लिया गया लेकिन कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से इस टेंडर को नहीं लगाया गया और फिर अगस्त महीने के आखिर में वित्तीय संकट को देखते हुए प्रस्ताव को टाल दिया गया।

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