चंडीगढ़ के दक्षिणी सेक्टरों की तर्ज पर अब नगर निगम सेक्टर एक से लेकर 30 तक की सफाई व्यवस्था को निजी हाथों में देने जा रहा है। फिलहाल इन सेक्टरों में सफाई व्यवस्था का जिम्मा निगम के कर्मचारियों पर है। निजीकरण के पीछे निगम का तर्क है कि 3012 सफाईकर्मियों पर लगभग 11 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। वहीं दक्षिण के 37 सेक्टरों की सफाई व्यवस्था के लिए नगर निगम लॉयंस कंपनी को हर माह महज साढ़े चार करोड़ रुपये ही देता है। ऐसे में अगर इन सेक्टरों की सफाई व्यवस्था भी निजी हाथों में दे दी जाए तो निगम को काफी फायदा होगा।
सेक्टर-1 से लेकर 30 तक जिन पार्षदों के क्षेत्र हैं, उन्होंने निगम को सुझाव दिया है कि दक्षिण के सेक्टरों की तर्ज पर उनके सेक्टरों में भी सफाई व्यवस्था को निजी हाथों में दे देनी चाहिए, क्योंकि कर्मचारियों की लापरवाही पर निगम सख्त कार्रवाई नहीं कर पाता है, वहीं, कंपनी की ओर से लापरवाही पर जुर्माने का प्रावधान है। इससे सफाई का स्तर भी बेहतर होगा। दक्षिण के सेक्टरों के लिए नवंबर के बाद टेंडर होना है, उससे पहले नए सेक्टरों के लिए टेंडर दिया जा सकता है। इस प्रस्ताव को नगर निगम जुलाई माह की सदन की बैठक में लेकर आ रहा है।
पुराने कर्मचारियों को प्राथमिकता से लेने की रखेंगे शर्त
नगर निगम ने तय किया है कि सेक्टर एक से लेकर 30 तक सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी, जिस कंपनी को दी जाएगी, उसे निगम के पुराने आउटसोर्स कर्मचारियों को प्राथमिकता पर रखना होगा। इसके अलावा नियमित कर्मचारियों को मनीमाजरा व ग्रामीण क्षेत्रों में लगाया जाएगा। ताकि नियमित व आउटसोर्स कर्मचारी पहले की तरह ही काम करते रहें।
सेक्टर एक से 30 तक कितने कर्मचारी
मुख्य सफाई निरीक्षक- 7
सफाई निरीक्षक- 47
सुपरवाइजर- 11
सफाई जमादार- 75
सफाईकर्मी- 2541
गाड़ी चालक- 331
कुल 3012
पार्षदों की ओर से सेक्टर एक से लेकर 30 तक सफाई व्यवस्था के निजीकरण के लिए प्रस्ताव दिया गया है। दोनों क्षेत्रों के तुलनात्मक अध्ययन के बाद जुलाई माह की सदन की बैठक में एजेंडा लाया जाएगा। सदन के फैसले के बाद आगे निर्णय लिया जाएगा। - केके यादव, नगर निगम आयुक्त