पंजाब में 73 प्रतिशत पानी की आपूर्ति जमीन से: मान
मान ने कहा कि हरियाणा ने पानी के मसले पर बंद पड़ी नहर को दोबारा शुरू करने की बात की थी लेकिन जब पानी ही नहीं है तो नहर बनाने का सवाल ही नहीं उठता। पंजाब को नदी-नालों से सिर्फ 27 प्रतिशत पानी मिल रहा है। 73 प्रतिशत पानी की आपूर्ति जमीन से की जा रही है। चूंकि हरियाणा छोटा भाई है, इसलिए प्रधानमंत्री के पास जाकर गंगा और यमुना के पानी की मांग की जा सकती है।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री से करेंगे बात: मनोहर
मनेाहर ने कहा कि एसवाईएल के मुद्दे पर अब केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से बात करेंगे। पानी के लिए तीन जजों का नया ट्रिब्यूनल बनाया गया लेकिन ट्रिब्यूनल के फैसले के मुताबिक पानी के लिए एसवाईएल का निर्माण जरूरी है। पंजाब के मुख्यमंत्री के साथ कुछ जरूरी मुद्दों पर भी बातचीत हुई है। घग्गर नदी के पानी को साफ करने के लिए दोनों राज्यों के अधिकारियों की कमेटी बनाई गई है।
बीबीएमबी मसले पर बोले मान, केंद्र को क्यों दिया जा रहा पानी
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बैठक में बीबीएमबी का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि इसमें पंजाब-हरियाणा का बराबरी का हिस्सा है तो फिर केंद्र को पानी क्यों दिया जा रहा है। बीबीएमबी में पंजाब से पावर विभाग और केंद्र से सिंचाई विभाग का सदस्य होता है। उन्होंने मालेरकोटला से होते हुए सिरसा-डबवाली के नजदीक मिलते लसाड़ा नाले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस नाले को हरियाणा ने बंद कर रखा है। समाना के समीप हांसी-बुटाना नहर के मामले को लेकर मान ने कहा कि यह कोर्ट में विचाराधीन है। पंजाब में पानी 600 फुट पर जा चुका है। सतलुज और ब्यास अब दरिया नहीं बल्कि नदियां बन चुकी हैं।
तब के तथ्य अब से काफी अलग थे: कैप्टन
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान को इतिहास को चुनिंदा तरीके से न उठाने की सलाह दी है। कैप्टन ने पटियाला जिले में एसवाईएल की आधारशिला रखने के बारे में 1981 का आमंत्रण दिखाने का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय वह पटियाला के सांसद थे और इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं। तब से 41 साल बीत चुके हैं और उस समय के तथ्य, अब जो हैं, उससे काफी अलग थे। उन्होंने मान से कहा कि जैसा कि उन्होंने खुद कहा है कि ऐसे समझौतों की हर 25 साल के बाद विभिन्न कारकों के आधार पर समीक्षा की जानी चाहिए, इसी तरह स्थिति और परिस्थितियां बदल गई हैं, जो तब थीं वो अब नहीं हैं।