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चंडीगढ़ मेयर चुनाव : भाजपा में क्रॉस वोटिंग का खतरा टला, अब नाराज पार्षदों को वोट के लिए निगम तक लाना चुनौती

Wed, 06 Jan 2021 10:25 AM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ निगम दफ्तर में बैठे मेयर पद के उम्मीदवार। - फोटो : फाइल फोटो
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चंडीगढ़ मेयर पद के लिए आठ जनवरी को वोटिंग होगी। इससे पहले भारतीय जनता पार्टी बगावत की चुनौती से जूझ रही है। भाजपा की बागी पार्षद चंद्रावती शुक्ला का नामांकन रद्द होने से हालांकि पार्टी ने राहत की सांस तो ली है लेकिन पार्टी के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। यह चुनौती है सभी पार्षदों को मतदान के लिए नगर निगम तक लेकर आना। 

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नाराज पार्षदों के पास अब कोई विकल्प नहीं है। अगर चंद्रावती शुक्ला चुनाव लड़ रही होतीं तो क्रॉस वोटिंग हो सकती थी लेकिन भाजपा पार्षद कांग्रेस के प्रत्याशी को वोट देकर पार्टी से गद्दारी नहीं करना चाहेंगे। ऐसे में उनके पास एक ही विकल्प बचा है। वे वोट न डालकर अपनी नाराजगी जाहिर कर सकते हैं। हालांकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद का दावा है कि उनके पास पूरे 21 वोट हैं। 

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सोमवार को मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए उम्मीदवारों के नाम की घोषणा होते ही भाजपा में बगावत शुरू हो गई थी। भाजपा पार्षद चंद्रावती शुक्ला ने मेयर पद के लिए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन भर दिया। उधर, पार्षद भरत कुमार ने भी पार्टी छोड़ दी।

पार्टी के अधिकारी सामने से बगावत करने वाले पार्षदों को मनाने में जुटे रहे, लेकिन वहीं भाजपा के कई पार्षद इस बगावत से खुश दिखे। मंगलवार को चंद्रावती शुक्ला का नामांकन रद्द होने से भाजपा की एक मुश्किल तो कम हुई है, लेकिन अब नाराज पार्षदों को वोट डालने के लिए निगम तक लाना चुनौती बन गया है। भाजपा पार्षद आखिरी वक्त में बहाने बनाकर निकले तो जीत का अंतर कम होते देर नहीं लगेगी।

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कोई पूर्वांचल तो कोई सिख समुदाय को जिम्मेदारी न मिलने से नाराज  
भाजपा में नाराजगी अपने पदों को लेकर नहीं बल्कि समुदाय के प्रतिनिधित्व को लेकर बनी हुई है। नाम न बताने की शर्त पर कुछ पार्षदों ने कहा कि पूर्वांचल के लोगों ने जब-जब नाराजगी जताई तब-तब पार्टी ने छोटी-मोटी जिम्मेदारियां देकर लॉलीपॉप दे दिया ताकि मामला तूल न पकड़े। वहीं दूसरी ओर कुछ पार्षद इस बात से नाराज हैं कि पांच सालों में किसी सिख समुदाय के व्यक्ति को बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई। 
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हीरा नेगी और सांसद का वोट भी होगा कम 
भाजपा पार्षद हीरा नेगी और उनके पति कोरोना संक्रमित हैं। दोनों ही होम आइसोलेशन में हैं इसलिए उनका वोट डालना मुश्किल है। इसी तरह सांसद किरण खेर भी मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती हैं। ऐसे में वह भी वोट डालने नहीं आ पाएंगी। ऐसे में डर है कि कहीं पार्षदों की बेरुखी भाजपा में जीत का अंतर कम न कर दे।

अगले वर्ष निगम चुनाव, बगावत न पड़ जाए भारी 
अगले वर्ष चंडीगढ़ नगर निगम का चुनाव है। ऐसे में बगावत करने से पहले पार्षदों के दिमाग में यह बात भी रहेगी कि टिकट मिलने में कोई समस्या न हो। ऐसे में बगावत करने वालों और उनके समर्थकों पर भी पार्टी के पदाधिकारियों की नजर रहेगी। ऐसी स्थिति में पार्षद अंदर से तो पार्टी के फैसले से बेशक खुश न हों, लेकिन खुल कर विरोध भी करने से बचेंगे ताकि टिकट पर आंच न आए। 

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