प्रेम है हिंदी, शौक है उर्दू और अंग्रेजी मजबूरी
साहित्यकार चंद्रशेखर वर्मा ने ने कहा कि मेरा हनीमून शिमला में मना और पहला स्टॉप था चंडीगढ़। यहां आना मुझे अच्छा लगता है। सुमिता मिश्रा के साथ उन्होंने बातचीत की। सुमिता मिश्रा ने जब पूछा कि आप साहित्यकार भगवती चरण वर्मा के परिवार से आते हैं, आप तो विरासत संभाले हुए हैं। इस पर उन्होंने कहा कि विरासत तो रोहन गावस्कर को भी मिली थी लेकिन क्रिकेट में कुछ खास कर नहीं पाए। एक-दो नेताओं को भी विरासत में सत्ता मिली लेकिन वो भी कुछ नहीं कर पाए। नाम नहीं लूंगा किसी का लेकिन जरूरी नहीं कि विरासत में जो मिला, उसे हम निभा सकें।
चंद्रशेखर वर्मा ने कहा कि पुत्र राजा का जो था उसने रियासत पाई और नेताओं के बेटों ने सियासत पाई, शारदे मां का आशीष था हमारे घर पर, साहित्य की अनमोल विरासत पाई। उन्होंने अंग्रेजी, उर्दू और हिंदी में लेखन किया है। इस पर उन्होंने कहा कि प्रेम है हिंदी, शौक है उर्दू और अंग्रेजी मजबूरी है, वो जुबान लेता हूं जो जहां जरूरी है... इस पर लोगों ने ठहाके लगाए और तालियां बजाईं। चंद्रशेखर वर्मा ने अपनी किताब से एक कहानी भी सुनाई।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में काफी व्यस्तता रहती है। हर किताब का अपना सफर होता है। लम्हों की सबनम पांच वर्षों के बाद आई है। लम्हों की शबनम कभी खुशी, गम, जीत और हार ओस की तरह होती है। इसके लिए मुश्किल से समय निकाला। इस दौरान सुमिता मिश्रा ने कविता भी पढ़ी। अपनों की दुनिया भुलानी पड़ती है, गैरों की हुकूमत बजानी होती है, एक मंजिल पाने के लिए कई मंजिलें गंवानी पड़ती हैं....। सुमिता ने कहा कि बचपन से कविता लिख रही हैं। पहली बार अंग्रेजी में लिखा, उसके बाद देर से हिंदी में कविता लिखी।