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जांच के नाम पर मजाक : सरकारी अस्पताल का कारनामा, 30 मिनट में निगेटिव से बनाया कोरोना पॉजिटिव 

Wed, 31 Mar 2021 10:03 AM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • चंडीगढ़ निवासी डॉक्टर ने 26 मार्च को जीएमएसएच-16 में दिया था नमूना
  • 28 को दोपहर में दी निगेटिव की रिपोर्ट, आधे घंटे बाद बताया पॉजिटिव 
  • कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच लापरवाही की हद 
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चंडीगढ़ में एक मरीज की रिपोर्ट आधे घंटे में निगेटिव से बनी पॉजिटिव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ के सरकारी अस्पताल में जांच के नाम पर मजाक हो रहा है। सेक्टर-15 निवासी एक डॉक्टर की कोरोना जांच रिपोर्ट महज 30 मिनट में निगेटिव से पॉजिटिव में बदल गई। जीएमएसएच-16 की इस लापरवाही ने डॉक्टर और उनके परिजनों को परेशानी में डाल दिया है। 

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डॉक्टर दविंदर कुमार ने जीएमएसएच-16 में आरटीपीसीआर जांच के लिए अपना नमूना दिया था। पहली बार तो उन्हें रिपोर्ट निगेटिव होने के बात बताई गई, लेकिन महज 30 मिनट बाद ही कहा गया कि उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव है। डॉ. दविंदर के पास इस समय निगेटिव और पॉजिटिव दोनों ही रिपोर्ट की हार्डकॉपी मौजूद है। अब उन्होंने अस्पताल प्रशासन से इसकी शिकायत की है।


चिंताजनक बात यह है कि पहली बार जब डॉ. दविंदर को बताया गया कि उनकी रिपोर्ट निगेटिव है तब उन्होंने अपने दोस्त व पूरे परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर दोपहर का भोजन किया। उसी दौरान उन्हें खुद के पॉजिटिव होने की सूचना मिल गई। अब परिवार के साथ उनके दोस्त के परिवार के सदस्य भी चिंतित हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने की बात कही है। 

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ये है मामला

सेक्टर-15 निवासी डॉ. दविंदर को पांच दिन से लगातार बुखार आ रहा था। जीएमएसएच-16 में दिखाया तो डॉक्टरों ने उन्हें आरटीपीसीआर जांच (कोरोना जांच) कराने को कहा। 26 मार्च को सुबह 9:30 बजे जीएमएसएच-16 में ही उन्होंने जांच के लिए नमूना दे दिया। 28 मार्च की दोपहर को उन्होंने अपने दोस्त भूपिंदर सिंह को रिपोर्ट लेने के लिए जीएमएसएच-16 भेजा, जहां उनके दोस्त को निगेटिव रिपोर्ट की कॉपी दी गई।

उनके दोस्त घर आकर उनके साथ खाना खा रहे थे कि तभी अस्पताल से फोन आया कि आप तत्काल अस्पताल आकर अपनी रिपोर्ट ले लीजिए क्योंकि रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। यह सुनते ही डॉ. दविंदर और भूपिंदर दोनों परेशान हो गए। भूपिंदर ने तत्काल अस्पताल जाकर दूसरी रिपोर्ट ली, जिसमें डॉ. दविंदर को पॉजिटिव करार दिया गया था।

इस दौरान उन्होंने अस्पताल के स्टाफ को बताया कि महज आधे घंटे पहले वह उसी मरीज की निगेटिव की रिपोर्ट लेकर गए हैं। ऐसे में आधे घंटे में ही कैसे किसी की रिपोर्ट बदल सकती है। इस पर स्टाफ ने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद वह पॉजिटिव व निगेटिव दोनों रिपोर्ट लेकर घर लौट आए। 
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निगेटिव-पॉजिटिव के चक्कर में चली गई थी भूपिंदर की पत्नी की जान

डॉ. दविंदर के दोस्त भूपिंदर के साथ ऐसा वाकया पहले हो चुका है। उन्होंने बताया कि नवंबर 2020 में उनकी और उनकी पत्नी नीलम भाटिया की तबीयत बिगड़ी। दोनों ने दो नवंबर को कोरोना जांच कराई। उनकी पत्नी की रिपोर्ट निगेटिव जबकि उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद पत्नी की तबीयत बिगड़ गई तो उन्हें 7 नवंबर को पीजीआई ले जाया गया। जहां उनका फिर कोराना टेस्ट किया गया, जो पॉजिटिव आया।

इसके बाद 8 नवंबर को पीजीआई में इलाज के दौरान नीलम भाटिया की मौत हो गई। भूपिंदर का कहना है कि रिपोर्ट पर हमें अब कोई विश्वास नहीं है, क्योंकि उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव थी तो वे बिल्कुल ठीक हैं और उनकी पत्नी की रिपोर्ट निगेटिव थी लेकिन उनकी मृत्यु हो गई।
यह बेहद गंभीर मामला है। इसमें किस स्तर पर चूक हुई है, इसकी जांच करवाई जाएगी क्योंकि जीएमएसएच-16 में सभी नमूने एकत्रित कर वहां से पीजीआई, जीएमसीएच-32 और प्रशासन द्वारा चयनित निजी लैब में भेजा जाता है। -डॉ वीके नागपाल, चिकित्सा अधीक्षक, जीएमएसएच 16
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