कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन का खतरा बढ़ता जा रहा है। चंडीगढ़ प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इस खतरे से निपटने के लिए वह पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन हकीकत यह है कि स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां हर स्तर पर अधूरी हैं। बात चाहे जीएमएसएच-16 में बनने वाले बच्चों के डेडिकेटेड अस्पताल की हो या खाली पदों को भरने की, हर काम अधूरा है। केंद्र सरकार ने 15 नवंबर तक तीसरी लहर के आने की आशंका जताई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर समय रहते तैयारियों को क्यों नहीं पूरा किया गया।
800 एलपीएम क्षमता वाले दो नए ऑक्सीजन प्लांट जीएमसीएच-32 व जीएमएसएच-16 में लगाए जा रहे हैं, जो दिसंबर के तीसरे हफ्ते तक काम करने लगेंगे। वहीं, इससे पूर्व पीजीआई, जीएमएसएच-16, जीएमसीएच-32 व सेक्टर-48 के अस्पताल में कुल 4000 एलपीएम क्षमता के प्लांट संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे में ऑक्सीजन तो बहुत है लेकिन चिंता की बात यह है कि तीसरी लहर आई तो आईसीयू बेड और वेंटिलेटर का इंतजाम कैसे होगा।
कोरोना और डेंगू के डंक से जनता को बचाने में जुटा विभाग के सामने कर्मचारियों की कमी भी बड़ी समस्या है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, नियमित 373 पदों में से 124 पद करीब 10 साल से खाली पड़े हैं। वहीं, कोविड के दौरान ठेके पर रखे गए 300 कर्मचारियों की भी सेवा दो महीने पहले समाप्त कर दी गई है। इतना ही नहीं एनएचएम के 178 कर्मचारियों को भी 35 दिनों पहले नौकरी से निकाल दिया गया है। ऐसे में डॉक्टरों व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों से दोगुना काम लेना मजबूरी बनी हुई है। अगर तीसरी लहर आई तो कर्मचारियों की कमी से स्थिति भयावह हो सकती है।
तीसरी लहर से बचाव के लिए केंद्र सरकार ने बच्चों के इलाज की व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एक 32 बेड के आईसीयू वाले डेडिकेटेड अस्पताल व दो हेल्थ सेंटर की स्थापना करने का निर्देश दिया गया था। यह काम 15 नवंबर से पहले पूरा होना था लेकिन जीएमएसएच-16 के नर्सिंग हॉस्टल में प्रस्तावित बच्चों के डेडिकेटेड अस्पताल का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है।
एक तरफ प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ओमिक्रॉन से बचाव की तैयारियों में जुटा है तो दूसरी ओर डेंगू का कहर जारी है। मौजूदा समय में शहर में प्रतिदिन 12 से 15 डेंगू के मरीज सामने आ रहे हैं। शहर में अब तक डेंगू के 1518 मरीज मिल चुके हैं। उधर, शहर के अस्पतालों में कोरोना के 66 मरीज भर्ती हैं।
अस्पताल ऑक्सीजन बेड आईसीयू बेड
तीसरी लहर से बचाव की तैयारी प्रत्येक स्तर पर की जा रही है। ऑक्सीजन से लेकर आईसीयू तक की बेहतर व्यवस्था करने का प्रयास जारी है। अस्पतालों के बेड के साथ ही तीन कोविड केयर सेंटर आपातकाल में खुलने के लिए तैयार हैं। रिक्त पदों को भरने के लिए वॉक इन इंटरव्यू की व्यवस्था है। -डॉ. सुमन सिंह, स्वास्थ्य निदेशक