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ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, तीन काबू

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चंडीगढ़। ठगी के रुपयों को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश कर चंडीगढ़ पुलिस ने महाराष्ट्र से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान नागपुर (महाराष्ट्र) निवासी अशोक रावत, आयुष संजय गायकवाड़ और निहाल दिनकर दोहरे के रूप में हुई है। निहाल कंप्यूटर इंजीनियर है जबकि अन्य दोनों आरोपी कंप्यूटर की पढ़ाई कर रहे हैं। पुलिस ने बुधवार को तीनों आरोपियों को जिला अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।
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सेक्टर-40 निवासी राहुल रावत ने कुछ समय पहले पुलिस को शिकायत दी थी कि उनके पिता बीमार हैं और इलाज के लिए उन्हें रुपयों की जरूरत थी। 31 दिसंबर 2021 को रुपये निकलवाने के लिए सेक्टर-17 स्थित बैंक गए थे। वहां पता चला कि खाते में रुपये ही नहीं हैं। उन्होंने पिता को फोन कर इसकी जानकारी दी। पिता ने बताया कि उनके खाते में करीब 15 लाख रुपये थे। इसके बाद राहुल ने बैंक स्टेटमेंट देखी तो पता चला कि उनके पिता के खाते से 12.65 लाख निकाले गए हैं। ठगी की जानकारी होते ही उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों का सुराग मिला, जिसके बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को नागपुर से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया है। अब पुलिस ये पता लगा रही है कि आरोपियों ने और कितने लोगों से ठगी की है। आरोपियों से क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट का पासवर्ड रिकवर कर पुलिस ठगी की रकम बरामद करने का प्रयास करेगी।
राहुल का रिश्तेदार है आरोपी अशोक, सिम बदलकर रुपये किए ट्रांसफर
बुधवार को प्रेसवार्ता कर पुलिस ने बताया कि आरोपी अशोक रावत पीड़ित राहुल रावत का दूर का रिश्तेदार है। दोनों कुछ समय पहले एक शादी समारोह में मिले थे। इसी दौरान अशोक ने राहुल के पिता का मोबाइल लेकर उसमें से सिम बदलकर अपने बैंक खाते में रुपये ट्रांसफर कर लिए। इसके बाद उसने अपने बैंक खाते से रुपयों को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर दिया।
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क्या है क्रिप्टोकरेंसी
साइबर सेल के निरीक्षक हरिओम शर्मा ने बताया कि क्रिप्टोकरेंसी वर्चुअल करेंसी है। करीब चार हजार वर्चुअल करेंसी बाजार में उपलब्ध हैं। शेयर बाजार की तरह लोग इन वर्चुअल करेंसी में निवेश करते हैं। इसके लिए आजकल कई तरह के एप उपलब्ध हैं। हरिओम ने बताया कि सामान्य करेंसी को कोई न कोई संस्था नियंत्रित करती है। जैसे अपने देश की करेंसी को भारतीय रिजर्व बैंक नियंत्रित करती है। रिजर्व बैंक भारतीय करेंसी को प्रिंट करता है और उसका हिसाब-किताब भी रखता है लेकिन क्रिप्टोकरेंसी को कोई संस्था नियंत्रित नहीं करती।
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