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Chandigarh: जीएमएसएच-16 में बच्चों का कोविड डेडिकेटेड अस्पताल अधूरा, दो साल में मशीनें ही नहीं हो पाई इंस्टॉल

Thu, 06 Apr 2023 05:06 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

12 से 14 साल के चिह्नित बच्चों में शत प्रतिशत को अभी पहली और दूसरी खुराक भी नहीं लगी है। 45 हजार बच्चों में से 36463 को पहली और 24905 को दूसरी खुराक लगाई गई है। वहीं महज 1865 को बूस्टर डोज लगाई गई है। जबकि इस आयु से कम उम्र वाले सभी बच्चे अभी टीके से वंचित है।
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सेक्टर 16 में बन रहा अस्पताल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना महामारी के दौरान गंभीर बच्चों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से चंडीगढ़ के जीएमएसएच 16 में कोविड डेडिकेटेड अस्पताल बनाने का निर्देश दिया गया था। सरकार ने निर्देश देने के साथ ही उपकरण खरीद के लिए बजट भी जारी कर दिया था। शुरूआती दौर में प्रक्रिया काफी तेज चली। मशीनों की खरीद चंद दिनों में कर ली गई। लेकिन अब उन मशीनों को इंस्टॉल करने के लिए समुचित व्यवस्था दो साल बाद भी नहीं बन पाई है। 

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चौंकाने वाली बात यह है कि जिस अस्पताल के लिए बना बनाया भवन मिला हो उसे दो साल को बाद भी शुरू नहीं किया जा सका है। चिंता की बात यह है कि कोरोना संक्रमण एक बार फिर बढ़ने लगा है। इस बार भी बच्चों पर खतरा ज्यादा है, क्योंकि वे टीके से वंचित हैं। इसके बावजूद कोविड डेडिकेटेड अस्पताल को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। निदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुमन सिंह का कहना है कि अस्पताल परिसर स्थित नर्सिंग इंस्टीट्यूट में जीर्णोंद्धार का कार्य तेजी से किया जा रहा है। जल्द ही बच्चों के लिए डेडिकेटेड अस्पताल की सुविधा बहाल कर दी जाएगी।

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बच्चे हैं टीके से वंचित, इसलिए चिंता जरूरी
चिंता की बात यह है कि 12 से 14 साल के चिह्नित बच्चों में शत प्रतिशत को अभी पहली और दूसरी खुराक भी नहीं लगी है। 45 हजार बच्चों में से 36463 को पहली और 24905 को दूसरी खुराक लगाई गई है। वहीं महज 1865 को बूस्टर डोज लगाई गई है। जबकि इस आयु से कम उम्र वाले सभी बच्चे अभी टीके से वंचित है। ऐसे में विभाग के चिकित्सा अधिकारियों व कर्मचारियों का कहना है कि बच्चों के लिए स्वीकृत डेडिकेटेड अस्पताल को संचालित करने में क्यों अनदेखी कर रहा है यह एक बड़ा सवाल है।
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डेडलाइन की बात बेमानी हो गई
कोरोना की दूसरी लहर के बाद स्वास्थ्य विभाग को इमरजेंसी कोविड रिस्पॉन्स पैकेज-2 के तहत 5.6 करोड़ रुपये मिले थे। इससे बच्चों के लिए 32 बेड का कोविड डेडिकेटेड अस्पताल बनाया जाना था। सरकार के निर्देशानुसार इस अस्पताल का निर्माण 15 नवंबर 2021 तक पूरा होना था। लेकिन यह तिथि कार्य योजना बनाने में ही निकल गई। आलम यह है कि जिस अस्पताल के लिए स्वास्थ्य विभाग को न तो अलग से बिल्डिंग बनानी है न ही मानव संसाधन की व्यवस्था करनी है, उसे लेकर ऐसी अनदेखी है। स्वास्थ्य विभाग की धीमी रफ्तार के कारण इस अस्पताल के निर्माण की अवधि बढ़ाकर जनवरी 2022 की गई थी। लेकिन उस तिथि के एक साल बाद भी भी निराशा का ही आलम है। आला अधिकारी अब डेड लाइन देने से कतरा रहे हैं।

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