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ये है चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी: दो साल में पांच लाख मीट्रिक टन कचरा नहीं हटा पाए, आगरा ने एक साल में दोगुना हटा दिया 

Mon, 04 Oct 2021 08:27 AM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पांच अक्तूबर को लखनऊ आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने आगरा नगर निगम के अधिकारी कुबेरपुर लैंडफिल साइट से बायोमाइनिंग तकनीक से कचरे के पहाड़ हटाने का प्रस्तुतिकरण देंगे। वहीं, चंडीगढ़ केवल अपने योजनाबद्ध तरीके से बसाए जाने पर ही स्मार्ट सिटी का मेडल लेना चाह रहा है।
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चंडीगढ़ में लगा कूड़े का ढेर। - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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स्मार्ट सिटी का तमगा लेकर अपनी पीठ थपथपाने वाला चंडीगढ़ दो साल में 5 लाख मीट्रिक टन कचरा निस्तारित नहीं कर सका। वहीं, आगरा (उत्तर प्रदेश) ने महज एक साल में 9.57 लाख मीट्रिक टन कचरा निस्तारित कर मिसाल कायम कर दी है।

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हैरानी की बात यह है कि चंडीगढ़ 25 एकड़ भूमि साफ नहीं कर सका, जबकि आगरा ने 72 एकड़ भूमि को साफ कर शानदार पार्क बना दिया। चंडीगढ़ दो साल में कोरोना के चलते मजदूर न होने और गीला कचरा निस्तारित न होने का बहाना बनाता रहा। पांच अक्तूबर को लखनऊ आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने आगरा नगर निगम के अधिकारी कुबेरपुर लैंडफिल साइट से बायोमाइनिंग तकनीक से कचरे के पहाड़ हटाने का प्रस्तुतिकरण देंगे। वहीं, चंडीगढ़ केवल अपने योजनाबद्ध तरीके से बसाए जाने पर ही स्मार्ट सिटी का मेडल लेना चाह रहा है।

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डड्डूमाजरा में 21 दिसंबर 2019 को कचरे का पहाड़ हटाने के लिए मशीनों का उद्घाटन हुआ। 18 माह में कचरे का पहाड़ हटाकर वहां खेल का मैदान बनाने का लक्ष्य तय हुआ था। तत्कालीन प्रशासक ने कहा था कि वह खुद हर महीने और सांसद किरण खेर हर 15 दिन में निरीक्षण करने आएंगी, लेकिन इस तरफ किसी ने मुड़कर नहीं देखा, वहीं आगरा की कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर 10 साल से जमे कूड़े के पहाड़ को खत्म करने के लिए 28 अक्तूबर 2019 को काम शुरू कराया गया।

आगरा को चुभी एनजीटी की फटकार, यहां तो रोज लगती है क्लास

साल 2011 में एनजीटी ने आगरा के अधिकारियों को फटकार लगाई। उसके बाद योजना बनाकर अधिकारियों ने इस समस्या को जड़ से समाप्त करने का फैसला लिया। वहीं, चंडीगढ़ निगम को एनजीटी से कई बार फटकार और नोटिस जारी हो चुके हैं। यहां तक कि कचरा निस्तारण प्लांट भी एनजीटी के निर्देश का हवाला देकर लिया गया, जो अब पूरी तरह ठप पड़ा है।
डड्डूमाजरा के लोगों के साथ छलावा हुआ है। चंडीगढ़ में दीवार बनाकर कूड़े को ढकने का प्रयास है। यह प्रयास कचरे को खत्म करने पर होता तो स्थिति अलग होती। -दयाल कृष्ण, अध्यक्ष, डंपिंग ग्राउंड ज्वाइंट एक्शन कमेटी
 
नए पहाड़ को खत्म करने की योजना
स्वच्छ भारत अभियान के तहत कचरे के नए पहाड़ को खत्म करने की योजना है। वहीं, पुराने कचरे को निस्तारित करने के लिए एक बार फिर से कंपनी से बात कर काम की तेजी के लिए कहा जाएगा। -आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम
 
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सात करोड़ ज्यादा देकर करा रहे निस्तारित, फिर भी पीछे

आगरा ने 9.57 लाख मीट्रिक टन कचरे को 25.92 करोड़ रुपये खर्च कर निस्तारित कराया, जबकि चंडीगढ़ में 5 लाख एमटी कचरे के लिए कंपनी को 33.38 करोड़ दिए गए हैं। इसमें भी कचरा गीला होने पर निस्तारित न होने का दावा किया जा रहा है। एनजीटी की ओर से अतिरिक्त मशीन लगाकर सीधे कंपनी को जल्द कचरा निस्तारित करने का आदेश जारी करना पड़ा।

आठ करोड़ से हटेगा दूसरा पहाड़
कचरा निस्तारण प्लांट की मशीनों के ठीक से काम न करने पर कचरा डंपिंग ग्राउंड भेजा जाने लगा। इससे सवा लाख टन का नए कचरे का पहाड़ बन गया। नगर निगम ने स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत नए कचरे के पहाड़ को खत्म करने की योजना केंद्र को भेजी है। इस पर आठ करोड़ खर्च होंगे।

मात्र 35 प्रतिशत कचरा निस्तारित
एक आरटीआई के जवाब में चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने बताया है कि अभी कंपनी ने सिर्फ 35 प्रतिशत ही काम किया है। 22 जून 2021 तक डड्डूमाजरा के माइनिंग लीगेसी वेस्ट पर 6 करोड़ 49 लाख रुपये खर्च किए गए हैं और अब तक 185800 मीट्रिक टन कूड़ा प्रोसेस किया गया है। स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने माना है कि कूड़े के पहाड़ को खत्म करने के लिए कंपनी ने धीमी गति से काम किया है। अब कंपनी को 23 नवंबर 2021 तक का समय दिया गया है, लेकिन इस समय सीमा में भी काम पूरा होता नहीं दिख रहा है।
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