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Chandigarh: चार लाख देकर बुक कराया था हेलिकॉप्टर, शादी में नहीं पहुंचा, अब भरना होगा मुआवजा

Thu, 08 Dec 2022 10:27 AM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़

सार

शिकायतकर्ता ने 24 जनवरी 2019 को मेसर्स एयरलॉजिक एविएशन सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को एक लाख रुपये की राशि का भुगतान किया। इसके बाद एयरलॉजिक एविएशन सॉल्यूशंस के निर्देश पर शिकायतकर्ता ने 13 फरवरी 2019 को स्थानीय अधिकारियों से हेलिकॉप्टर के उड़ान भरने और उतरने की अनुमति ली।
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(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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चार लाख रुपये देने के बावजूद शादी के समय हेलिकॉप्टर नहीं भेजने पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंडीगढ़ ने संबंधित दो कंपनियों को सेवा में कोताही का दोषी करार दिया। आयोग ने जेट सर्व एविएशन प्राइवेट लिमिटेड और नई दिल्ली स्थित मेसर्स एयर लॉजिक एविएशन सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को निर्देश दिया कि वे शिकायतकर्ता को चार लाख रुपये नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाएं। साथ ही सेवा में कोताही के लिए 25 हजार रुपये मुआवजा और आठ हजार रुपये मुकदमा खर्च के भी अदा करें। आदेश की प्रति मिलने के 30 दिनों के अंदर निर्देश का पालन नहीं करने पर लौटाई जाने वाली राशि और मुआवजा राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज अदा करना होगा। 

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शिकायतकर्ता सेक्टर-30 निवासी अमनदीप जोशी ने गुरुग्राम स्थित मेसर्स जेट सर्व एविएशन प्राइवेट लिमिटेड और नई दिल्ली स्थित मेसर्स एयर लॉजिक एविएशन सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंडीगढ़ में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता अमनदीप जोशी ने उपभोक्ता आयोग को बताया कि उनकी 23 फरवरी 2019 को जालंधर में शादी थी। इस दिन के लिए उन्होंने एक हेलिकॉप्टर बुक किया। हेलिकॉप्टर जालंधर से ऊना और ऊना से जेएसए हेलीपैड के लिए बुक कराया था। जेट सर्व एविएशन प्राइवेट लिमिटेड ने उन्हें ईमेल के माध्यम से चार लाख 20 हजार 375 रुपये की कोटेशन भेजी। इसमें उड़ान की तिथि, यात्रा की योजना, उड़ान घंटे की दर और अन्य शुल्क शामिल थे। 

शिकायतकर्ता ने 24 जनवरी 2019 को मेसर्स एयरलॉजिक एविएशन सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को एक लाख रुपये की राशि का भुगतान किया। इसके बाद एयरलॉजिक एविएशन सॉल्यूशंस के निर्देश पर शिकायतकर्ता ने 13 फरवरी 2019 को स्थानीय अधिकारियों से हेलिकॉप्टर के उड़ान भरने और उतरने की अनुमति ली। शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग को बताया कि 20 फरवरी 2019 को तीन लाख रुपये की राशि का भुगतान किया। शेष राशि 20 हजार 375 रुपये का भुगतान दूसरे पक्षों की ओर से सेवा प्रदान करने के बाद किया जाना था मगर हेलिकॉप्टर सेवा नहीं प्रदान की गई कि शेष राशि का भुगतान नहीं किया गया। हेलिकॉप्टर सेवा नहीं प्रदान करने पर शिकायतकर्ता ने दी गई राशि मांगी, जिसे नहीं लौटाया गया। दूसरे पक्ष की ओर से उपभोक्ता आयोग में अपना पक्ष नहीं रखने पर उसे एकतरफा करार दिया गया।

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