चंडीगढ़। सीबीआई की विशेष अदालत ने शिमला में हुए गुड़िया दुष्कर्म और हत्याकांड के आरोपी नेपाली युवक सूरज की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में आरोपी शिमला के निलंबित आईजी जहूर हैदर जैदी की जमानत याचिका को दूसरी बार खारिज कर दिया।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि याची को इस मामले में झूठा फंसाया गया है। याची लंबे समय से जेल में है और इस मामले का फैसला आने में अभी समय लग सकता है इसलिए याची को जमानत दी जानी चाहिए। वहीं सरकारी वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरोपी को पांच अप्रैल 2019 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। इसके बाद आरोपी ने मामले से जुड़ी अहम गवाह आईपीएस अधिकारी सौम्या सांबशिवन को धमकाकर उन पर बयान बदलने का दबाव बनाया। आईपीएस सौम्या की शिकायत पर आरोपी की जमानत को 24 जनवरी 2020 को खारिज कर दिया गया था। यदि आरोपी को दोबारा जमानत दी जाती है तो वह फिर से मामले से जुड़े गवाहों को प्रभावित कर सकता है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
यह था मामला
शिमला जिले के कोटखाई में चार जुलाई 2017 को 16 वर्षीय एक छात्रा स्कूल से लौटते वक्त लापता हो गई थी। छह जुलाई को कोटखाई के तांदी के जंगल में छात्रा का शव निर्वस्त्र हालत में मिला। पुलिस की जांच में छात्रा से दुष्कर्म के बाद हत्या होने की बात सामने आई थी। इस मामले की जांच के लिए शिमला के तत्कालीन आईजी जहूर हैदर जैदी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई। एसआईटी ने इस मामले में एक स्थानीय युवक सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें से एक नेपाली युवक सूरज की कोटखाई थाने में पुलिस हिरासत के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। जांच में सीबीआई ने पाया कि आरोपी सूरज की मौत पूछताछ के पुलिस द्वारा प्रताड़ित करने से हुई थी। इसके आधार पर सीबीआई ने आरोपी जैदी सहित 9 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनको गिरफ्तार कर लिया था। बाद में यह केस चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था। वर्ष 2017 से चंडीगढ़ जिला अदालत स्थित विशेष सीबीआई अदालत में इस केस की सुनवाई हो रही है।