हड़ताल को लेकर यूटी पावरमैन यूनियन और चंडीगढ़ प्रशासन के बीच समझौता हुआ था। उस समझौते के बावजूद जो कर्मी ड्यूटी पर वापस नहीं लौटे थे ऐसे 143 कर्मचारियों के खिलाफ एस्मा के तहत करवाई की जा रही है। इनमें से 17 को बर्खास्त किया जा चुका है। बाकी 126 कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कर्मचारी यूनियन को भी जमकर फटकार लगाई। यूटी पावरमैन यूनियन ने हाईकोर्ट को विश्वास दिलाया कि वह आगे हड़ताल पर नहीं जाएंगे और इस हड़ताल के लिए प्रशासन कर्मियों के खिलाफ जो कार्रवाई कर रहा है, उसमे कोई दखल नहीं देंगे।
यूटी पावरमैन यूनियन की हड़ताल पर हाईकोर्ट ने लिया था संज्ञान
बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ यूटी पावरमैन यूनियन 22 फरवरी को हड़ताल पर चली गई थी। इसके बाद कुछ शरारती तत्वों ने शहर में जगह-जगह बिजली के भूमिगत तार काट कर पूरे शहर को अंधेरे में झोंक दिया। इसका संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के चीफ इंजीनियर को तलब कर लिया था।
चीफ इंजीनियर ने बताया कि प्रशासन का यूनियन से समझौता हो गया है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा था कि एक तरफ एस्मा लगा कार्रवाई की बात हो रही है और दूसरी ओर प्रशासन कर्मचारियों के सामने घुटने टेक रहा है। यह तो यूनियन के पैरों पर गिरने जैसा है। अगर समझौता ही करना है तो निजीकरण के खिलाफ हाईकोर्ट में चल रहे मामले को भी अपने पास भेज देते हैं उसका भी समझौता कर लो। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासन ने 23 फरवरी की शाम को एस्मा भी लगा दिया।