चंडीगढ़ प्रशासन के नौ विभाग अपने कुल बजट का 50 प्रतिशत हिस्सा भी नहीं खर्च कर पाए। इनमें परिवहन विभाग सबसे पीछे रहा। इन फिसड्डी विभागों का खामियाजा दूसरे विभागों को भी अपने बजट में कटौती के रूप में भुगतना पड़ रहा है। इन विभागों की वजह से यूटी का 225 करोड़ रुपये का बजट पहले ही कट चुका है।
1 अप्रैल 2015 से 31 जनवरी 2016 तक की बजट रिपोर्ट में ऐसे 9 विभागों के नाम सबसे आगे हैं। परिवहन विभाग इस सूची में सबसे ऊपर है। खासकर सीटीयू अपने कुल बजट का महज 37.50 प्रतिशत ही खर्च पाया। सीटीयू को कैपिटल प्लान के तहत 34 करोड़ 15 लाख रुपये मिले थे।
जिसमें से 4 करोड़ 37 लाख 26 हजार रुपये यानी 12.80 प्रतिशत ही खर्च हुआ। हालांकि रेवेन्यू बजट का 82.50 प्रतिशत खर्च हो गया। विभागों को रेवेन्यू प्लान और कैपिटल प्लान के तहत बजट मिलता है। रेवेन्यू प्लान नॉन डेवलपमेंट और कैपिटल प्लान का बजट डेवलपमेंट कार्यों केलिए मिलता है।
जिला सैनिक बोर्ड, एसटीए और आर्किटेक्चर विभाग भी 50 प्रतिशत तक बजट नहीं खर्च पाए। विभागों की नाकामी की वजह से ही वित्त मंत्रालय ने 225 करोड़ रुपये का बजट काट लिया। इस बार प्रशासन ने प्लान हेड के तहत दोगुणा बजट मांगा है।
अब देखना यह होगा कि वित्त मंत्रालय कितना बजट प्रशासन को देता है। पिछली बार प्लान बजट में 634 करोड़ रुपये मिला था, जबकि इस बार 2 हजार करोड़ रुपये मांगे गए हैं।