चंडीगढ़ में मंगलवार को हुए मेयर चुनाव में मतदान तक माहौल शांतिपूर्ण बना रहा लेकिन जैसे ही वोटों की गिनती शुरू हुई स्थिति एकदम पलट गई।
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के पार्षदों ने पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह पर वोटों से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इस बीच मेयर की घोषणा हो गई। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आगे अब वह क्या करें। इस दौरान नेतृत्व की कमी देखी गई। आप और कांग्रेस के पार्षद एक दूसरे की तरफ देखते रहे।
पूरे विवाद के बाद आप और कांग्रेस के पार्षदों ने सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया और वह सदन से बाहर आ गए। इसके बाद कुछ पार्षद मेयर दफ्तर के बाहर बैठकर प्रदर्शन करने लगे तो कुछ मीडिया से बात करने लगे।
थोड़ी देर बाद कुछ पार्षद नगर निगम कार्यालय के पांचवें फ्लोर से उतरकर नीचे चले गए तो कुछ पार्षद ऊपर ही मौजूद रहे। पार्षद एक दूसरे से पूछते नजर आए कि अब आगे क्या करना है। किसी के पास कोई योजना नहीं थी, न ही कोई एक ऐसा नेता, जो सभी को ऐसी स्थिति में एक सूत्र में बांध सके। थोड़ी देर में कुछ पार्षद नगर निगम से निकल गए और निगम कार्यालय के पास ही पोस्ट ऑफिस के बाद सड़क पर बैठ गए। कुछ देर नारेबाजी हुई।
इतनी देर में निर्देश आया तो वह फिर निगम कार्यालय के अंदर जाने लगे। पुलिस ने उन्हें जाने से भी रोका। पार्षदों के विरोध करने पर उन्हें दोबारा अंदर जाने दिया गया। यह क्रम काफी देर तक चलता रहा। सभी असमंजस में रहे कि करना क्या है। स्थिति यह रही कि बाहर आने के बाद जब दोबारा निगम कार्यालय में जाने को कहा जाने लगा तो कांग्रेस के एक पार्षद ने जोर से कहा कि पहले डिसाइड कर लो कि करना क्या है।
संदीप पाठक ने कहा था कि एक हफ्ते में होगी कार्यकारिणी की घोषणा
मेयर चुनाव में हुए इस पूरे खेल के बाद आम आदमी पार्टी के अंदर एक बार फिर नेतृत्व की कमी का मुद्दा जोर-जोर से उठने लगा है। मंगलवार और बुधवार को आम आदमी पार्टी के व्हाट्सएप ग्रुप में कार्यकारिणी के नहीं होने की बात उठी। कई लोगों ने कहा कि अगर कार्यकारिणी होती या कोई अध्यक्ष होता तो सभी पार्षदों को एक सूत्र में बांधना आसान होता लेकिन ऐसा नहीं होने की वजह से सभी एक-दूसरे की तरफ देखते नजर आए।
जनवरी 2023 में पार्टी ने प्रदेश कार्यकारिणी को भंग कर दिया था। 26 अक्टूबर 2023 को पार्टी में जान फूंकने के लिए संदीप पाठक चंडीगढ़ पहुंचे थे और उन्होंने एक हफ्ते में कार्यकारिणी की घोषणा करने का वादा किया था लेकिन तीन महीने बाद भी कार्यकारिणी की घोषणा नहीं की गई है। इससे पार्टी के कई पार्षद और कार्यकर्ता नाराज हैं। कार्यकारिणी न होने से पार्टी को काफी नुकसान भी झेलना पड़ा है।