चंडीगढ़। मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के 40 साल पूरे होने पर सोमवार को सेक्टर-39 स्थित मौसम भवन में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को केंद्र में आमंत्रित कर उन्हें नई तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम में मौसम विज्ञान केंद्र नई दिल्ली के क्षेत्रीय प्रमुख चरण सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को बताया गया कि मौसम विज्ञान केंद्र किस तरह और किन उपकरणों के माध्यम से तापमान, वर्षा और हवा की गति की संभावना व्यक्त करता है। कार्यक्रम में मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के निदेशक मनमोहन सिंह और क्षेत्रीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला के निदेशक डॉ. आरए सिंह भी उपस्थित रहे। मनमोहन सिंह ने कहा कि मौसम के लिहाज से पूरे उत्तर भारत में चंडीगढ़ का महत्वपूर्ण स्थान है। पिछले 40 साल के सफर के बारे में मनमोहन सिंह ने कहा कि इस दौरान तकनीक में काफी बदलाव आया है। वर्ष 1980 से पहले भारत के पास अपने सेटेलाइट नहीं थे। मैनुअल तरीके से रीडिंग ली जाती थी। अब कई नई और एडवांस मशीनें आ गई हैं। पहले एक्यूरेसी 50-60 फीसदी तक ही थी, लेकिन अब सब कुछ ऑटोमैटिक हो गया है। इसकी वजह से अब एक्यूरेसी भी 80-85 फीसदी तक पहुंच गई है। मनमोहन सिंह ने बताया कि उन्होंने करीब साढ़े 18 साल शिमला में अपनी सेवाएं दी हैं, लेकिन चंडीगढ़ में काम करने का अनुभव काफी अलग है।
धीरे-धीरे बढ़ रहा है चंडीगढ़ का अधिकतम तापमान : मनमोहन सिंह
मनमोहन सिंह ने कहा कि पिछले कई साल में चंडीगढ़ के औसत तापमान में हल्की बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन ये पूरे देश व विश्व में हुआ है। उन्होंने बताया कि इसके पीछे बड़ा कारण ग्लोबल वार्मिंग हैं। शहर के डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड पर उन्होंने कहा कि इसका असर मौसम पर माइक्रो स्तर पर असर पड़ता है। आसपास के इलाकों पर उसका असर देखा जा सकता है। अगर डंपिंग ग्राउंड के पास मशीन लगाई जाती है तो उसके असर के बारे में जानकारी मिल सकती है। बताया कि केंद्र प्रशासन के विभिन्न विभागों के साथ भी लगातार संपर्क में रहता है और उन्हें आंकड़े उपलब्ध कराता है।