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नगर निगम चुनाव: हरीश चौधरी को पंजाब से पहले चंडीगढ़ में दिखानी होगी ताकत, अंतर्कलह से जूझ रही कांग्रेस को एकजुट करना बड़ी चुनौती

Sat, 23 Oct 2021 01:22 PM IST
प्रमोद कुमार अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़

सार

नगर निगम चुनाव में जीत के लिए भले ही कांग्रेस जोर लगा रही है, लेकिन अंतर्कलह के कारण दूसरे दलों के निशाने पर है। हरीश चौधरी को पंजाब से पहले चंडीगढ़ में एकजुट करने को ताकत दिखानी होगी। अंतर्कलह से जूझ रही कांग्रेस को एकजुट करना ही उनके लिए बड़ी चुनौती रहेगी।
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नगर निगम चंडीगढ़ कार्यालय। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पंजाब और चंडीगढ़ के नए प्रभारी हरीश चौधरी को अंतर्कलह से जूझ रही कांग्रेस को सहेजना बड़ी चुनौती होगा। चंडीगढ़ में दिसंबर में नगर निगम चुनाव हैं और कांग्रेस में घमासान मचा है। जबकि पंजाब में विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं। ऐसे में चौधरी को पंजाब से पहले चंडीगढ़ में अपने आपको साबित करना होगा। कांग्रेस को एकजुट करना आसान नहीं होगा। वार्डों के आरक्षित होने के बाद नगर निगम चुनाव के लिए उठापटक तेज हो गई है। चंडीगढ़ कांग्रेस के नए प्रभारी हरीश चौधरी के लिए रणनीति तय करने को ज्यादा समय नहीं है।

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काफी लोग जा चुके आम आदमी पार्टी में
चंडीगढ़ कांग्रेस से काफी संख्या में कार्यकर्ता आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए हैं। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष व पार्षद देवेंद्र सिंह बबला ने प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चावला पर व्हाट्सएप समूह में सवाल उठाया था। इस पर चावला ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि पुराने कार्यकर्ताओं को किनारे करके टिकट का आश्वासन देकर किसी को रोकना गलत होगा। इस बीच सदन में भी कांग्रेस नेताओं की एकजुटता में कमी दिखी थी। इस कारण कांग्रेस को वॉकआउट करना पड़ा और भाजपा ने बिना किसी बहस के मुद्दों को सहजता से पास करवा लिया।
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पांच से 35 सीटों तक का सफर नहीं होगा आसान
नगर निगम में वर्तमान में कांग्रेस के पांच पार्षद हैं। इस बार वार्ड बढ़ने के बाद दावेदारों की संख्या भी बढ़ गई है। इधर, किसान आंदोलन ने आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल-बसपा गठबंधन सहित अन्य दलों के लिए भी एक मौका बना दिया है। ऐसे में अब भाजपा और कांग्रेस के बीच होने वाला मुकाबला अब और रोमांचक हो गया है, इसलिए किसी भी पार्टी के लिए इस बार चुनाव आसान नहीं होगा।
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चन्नी के लिए भी निगम चुनाव रहेगा चुनौती
नए प्रभारी के लिए चंडीगढ़ के अलावा पंजाब में चल रही राजनीतिक हलचल पर नजर रखनी होगी। इधर, निगम चुनाव पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के लिए भी चुनौती वाला होगा, क्योंकि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके नेतृत्व में यह पहला बड़ा मौका होगा, जहां पार्टी के सामने जीतने की चुनौती होगी। वहीं, नए प्रभारी के सामने टिकट के दावेदारों में तालमेल बनाना बड़ी चुनौती होगी।

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