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हरसिमरत कौर के चुनाव को चुनौती: अब अगली सुनवाई 13 जुलाई को

Thu, 07 Apr 2016 12:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कोर्ट - फोटो : file photo
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केंद्रीय मंत्री एवं बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल के चुनाव को चुनौती देती याचिका पर फिर से शुरू हुई सुनवाई पर उनके दो वकील पेश हो गए हैं। उन्होंने जवाब के लिए समय की मांग की है। अब सुनवाई 13 जुलाई को होगी।
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पिछले साल मई महीने में हरसिमरत को हाईकोर्ट से उस वक्त बड़ी राहत मिली थी जब, उनके चुनाव को रद्द करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में दायर याचिका हाईकोर्ट के जस्टिस महेश ग्रोवर की एकल बेंच ने शुक्रवार को खारिज कर दी थी। उस वक्त हाईकोर्ट ने माना था कि याचिका दायर करने में देरी हुई।

इसी फैसले पर पुनर्विचार करने की अर्जी दायर की गई थी। याचिकाकर्ता नवजोत सिंह ने एडवोकेट सुरजीत सिंह सवैच के माध्यम से अर्जी में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट एक फैसले में मान चुकी है कि मतगणना वाले दिन को उस अवधि में नहीं गिना जाएगा, जिस अवधि में चुनाव के खिलाफ याचिका दायर करनी होती है। हाईकोर्ट ने पुनर्विचार याचिका पर नोटिस जारी करके जवाब मांग लिया था ।
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सुनवाई के दौरान बुधवार को हरसिमरत की ओर से सीनियर एडवोकेट और एजी अशोक अग्रवाल एवं सीनियर एडवोकेट एमएल सग्गड़ पेश हुए और जवाब दाखिल करने को समय देने की मांग की है। हरसिमरत बादल के खिलाफ चुनाव रद्द करने की याचिका दायर की गई थी। इस मुख्य याचिका में हरसिमरत ने अपने वकील के माध्यम से अर्जी दायर करके आरोप लगाया था कि याचिका दायर करने में देरी हुई।

हालांकि याचिकाकर्ता के वकील सुरजीत सिंह स्वैच ने कहा था कि याचिका समय रहते दायर की गई। बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि याचिका दायर करने में एक दिन की देरी हुई। बेंच के इस फैसले के साथ ही अब हरसिमरत बादल की लोकसभा सदस्यता रद्द करने को लेकर दायर मुख्य याचिका की सुनवाई आगे नहीं चलने का रास्ता साफ हो गया था।

एक दिन में फंसा है मामला: लोकसभा चुनाव का परिणाम 16 मई 2014 को आया था और हरसिमरत बादल विजयी रही थीं। इसके हिसाब से चुनाव याचिका दायर करने की 45 दिन की अवधि 29 जून बनती थी, लेकिन याचिका 30 जून को दायर की गई थी। उधर 29 जून को रविवार था, लेकिन रविवार को भी चुनाव याचिका दायर की जा सकती थी। इसी कारण बेंच ने माना था कि याचिका दायर करने में देरी हुई है। याचिकाकर्ता नवजोत सिंह के वकील स्वैच अब दलील दी है कि 16 मई के हिसाब से 45 दिन की अवधि 29 जून को समाप्त होती थी और उस दिन रविवार था। याचिका दायर करने के लिए 45 दिन की जो अवधि बनती है, उसमें चुनाव परिणाम घोषित करने के दिन को नहीं गिना जाता। ऐसे में उन्होंने आखिरी दिन 30 जून बनता था।

यह था मामला: याचिका में आरोप लगाया था कि चुनाव प्रचार के लिए जारी विज्ञापनों में हरसिमरत बादल ने सिख धर्म के प्रतीकों का इस्तेमाल किया। धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। यह भी कहा था कि चुनाव पर बेशुमार खर्च किया गया, लेकिन चुनाव अधिकारी के समक्ष दायर शपथ पत्र में काफी कम खर्च दिखाया गया। इसमें बठिंडा में हुई मोदी की रैली में आया खर्च कम दिखाया गया। अपने जवाब में हरसिमरत ने कहा था कि एक तो याचिका दायर करने में देरी हुई, इसलिए याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकती। दूसरा मोदी की रैली में अन्य उम्मीदवार भी शामिल हुए थे और हरसिमरत के खिलाफ याचिका दायर करते वक्त इन उम्मीदवारों को प्रतिवादी नहीं बनाया गया।
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